Thursday, 28 April 2011

सावन ने आग लगाई

मैं बी.ए. में पढ़ रही हूँ। पिछले सावन तक तो मेरा नाम मेरा नाम मीनल ही था। लेकिन पिछले सावन की उस बारिश भरी रात में नहाने के बाद तो मैं मीनल से मैना ही बन गई हूँ। आप भी सोच रहे होंगे कि अजीब झल्ली लड़की है ! भला यह क्या बात हुई- कोई सावन की बारिश नहा कर कोई लड़की भला मीनल से मैना कैसे बन सकती है ?
ओह.. मैं बताना ही भूल गई।
दरअसल बात यह है कि मेरी एक बहुत ही प्यारी सहेली है शमा खान। एक नंबर की चुद्दक्कड़ है। अपने भाईजान के साथ चुदाई के किस्से इस तरह रस ले ले कर सुनाती है कि मेरी मुनिया भी पीहू पीहू बोलने लग जाती है। मेरे साथ बी.ए. कर रही है। अगले महीने उसकी शादी भी होने वाली है अपने चचा के लड़के के साथ। पर उन्हें शादी की कोई जल्दी नहीं है क्योंकि वो तो शादी से पहले ही रोज अपनी सुहागरात मनाते हैं।
शमा बताती है कि उनके भाईजान (गुल खान) उनके चचा का लडके हैं। उनका परिवार भी उनके साथ वाली कोठी में ही रहता है। उनका कपड़े का बहुत बड़ा कारोबार है। शमा अपने माँ-बाप की इकलोती औलाद है और गुल भी अपने माँ बाप का इकलौता लड़का और 5 बहनों का एक ही भाई है। दोनों की सगाई हो चुकी है और अगले महीने शादी है।
क्लास रूम में हम दोनों साथ साथ ही बैठती हैं। जब भी कोई खाली पीरियड होता है तो हम दोनों कॉलेज के लॉन या कैंटीन में चली जाती हैं और फिर शमा अपनी चुदाई के किस्से रस ले ले कर सुनाती है कि कल रात भाईजान ने किस तरीके या किस आसन में उसकी धमाकेदार चुदाई की थी।
एक बार मैंने उससे पूछा था कि तुम्हें शादी से पहले यह सब करने में डर नहीं लगता? तो उसने जो जवाब दिया था- आप भी सुन लें “चुदाई में डर कैसा ? खूब मस्त होकर चुदवाती हूँ मैं तो और रही हमल (गर्भ) ठहरने की बात तो आज कल बाज़ार में बहुत सी पिल्स (गोलियाँ) मिलती हैं जिनसे उसका भी कोई खतरा नहीं है।”
“लेकिन वो .. पहली चुदाई तो सुहागरात में की जाती है ना… तुमने तो शादी के पहले ही सब कुछ करवा लिया अब सुहागरात में क्या करोगी ?” मैंने पूछा तो वो हंसते हुए बोली
“अरे मेरी भोली बन्नो मेरी चूत की सहेली फिर किस काम आएगी ?”
मैंने हैरानी से उसे देखते हुए पूछा “वो क्या होती है ?”
“तुम तो एक नंबर की बहनजी हो अरे भाई मैं गांड बेगम की बात कर रही हूँ !” उसने आँख मारते हुए कहा तो मेरी हंसी निकल गई।
“छी … छी… उसमें भी भला कोई करता है ?” मैंने कहा।
“अरे मेरी जान इसमें नाक चढ़ाने वाली क्या बात है, चुदाई में कुछ भी गन्दा या बुरा नहीं होता ! इस जवानी का पूरा मजा लेना चाहिए। मेरे भाईजान तो कहते हैं असली मजा तो गांड बाजी में ही आता है ये तो जन्नत का दूसरा दरवाजा है !” वो जोर जोर से हंसने लगी।
“तो क्या उन्होंने तुम्हारी ? … मेरा मतलब …” मैं गड़बड़ा सी गई।
“नहीं उसके लिए मैंने ही मना कर दिया है। गांड तो मैं उनसे जरूर मरवाउंगी पर सुहागरात को !” शमा ने कहा “अच्छा चल मेरी छोड़, तू बता तूने कभी कुछ किया है या नहीं ?”
“मैंने ?? अरे ना बाबा ना … मैंने कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया ”
“तुम भी निरी बहनजी हो। शादी से पहले की गई चुदाई में अलग ही मज़ा होता है। लड़की की खूबसूरती चुदाई के बाद और भी बढ़ जाती है। ये देख मेरे मम्मे और चूतड़ (नितम्ब) कितने गोल मटोल हो गए हैं एक साल की चुदाई में ही। तू किसी को क्यों नहीं पटाती ? क्यों अपनी जालिम जवानी को बर्बाद कर रही है। इन मम्मों का दूध किसी प्यासे को पिला दिया कर 32 से 36 हो जायेंगे।”
कितना गन्दा बोलती है ये शमा। मुझे तो इन अंगों का नाम लेते हुए भी शर्म आती है फिर चुदाई की बात तो दूर की है। पर जब भी शमा अपनी चुदाई की बात करती है तो मेरी मुनिया भी चुलबुला कर आंसू बहाने लग जाती है और फिर मुझे टॉयलेट में जा कर उसकी पिटाई करनी पड़ती है।
मैंने अभी तक अपना कौमार्य बचा कर रखा था। मैं तो चाहती थी कि अपना अनछुआ बदन अपने पति को ही सुहागरात में समर्पित करुँ पर इस शमा की बातें सुन सुन कर और इस पिक्की में अंगुली कर करके मैं भी थक चुकी थी। मेरी रातों की नींद इस शमा की बच्ची ने हराम कर दी थी। पर अब मैंने भी सोच लिया था कि एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लिया जाए।
पर सबसे बड़ा प्रश्न तो यह था कि किसके साथ ? मोहल्ले में तो कई शोहदे अपना लंड हाथों में लिए फिरते है पर मेरे ख़्वाबों का शहजादा तो उनमें से कोई भी नहीं है। हाँ कॉलेज में जरूर एक दो लडके मेरी पसंद के हैं पर वो भी किसी न किसी लड़की के चक्कर में पड़े रहते हैं।
और फिर जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली। प्रेम भैया 3-4 दिन पहले ही तो हमारे यहाँ आये है अपनी ट्रेनिंग के सिलसिले में। पहले तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया था। ओह… मैं भी निरी उल्लू ही हूँ इतना सुन्दर सजीला जवान मेरे पास है और मैं अपनी चूत हाथों में लिए बेकार घूम रही हूँ। प्रेम भैया मेरी जोधपुर वाली मौसी के लड़के है। बचपन में तो हम साथ साथ ही खेलते और बारिश में नहाते थे पर पिछले 4-5 साल में मैं उनसे नहीं मिल पाई थी। परसों जब वो आये थे तो उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया था। तब पहली बार मुझे लगा था कि मैं अपने भैया के नहीं किसी मर्द के सीने से लगी हूँ। मेरे उरोज उनके सीने से लग कर दब से गए थे। पर वो तो मुझे अभी भी छोटी बच्ची ही समझ रहे होंगे। मैंने सोचा क्यों ना प्रेम भैया से …..
ओह … पर यह कैसे संभव हो सकता है वो मेरे सगे तो नहीं पर मौसेरे भाई तो हैं और भाई के साथ… ओह ये नहीं हो सकता ? वो तो अभी भी मुझे बच्ची ही समझते होंगे। उन्हें क्या पता कि मैं अब बच्ची नहीं क़यामत बन चुकी हूँ। मेरे नितम्ब देख कर तो अच्छे अच्छों के पपलू खड़े हो जाते हैं और उनके सीने पर सांप लोटने लग जाते है रास्ते में चलते हुए जब कोई फिकरे कसता है या सीटी बजाता है तो मुझे बहुत गुस्सा आता है पर फिर मैं रोमांच से भी भर जाती हूँ। काश मैं भी शमा की तरह होती तो मैं भी प्रेम के साथ आसानी से सब कुछ करवा लेती और शादी के बारे में भी सोच सकती थी पर हमारे धर्म और समाज में ऐसा कैसे हो सकता है। पता नहीं इन धर्म और समाज के ठेकेदारों ने औरत जाति के साथ हमेशा ही अत्त्याचार क्यों किया है। औरत और मर्द का रिश्ता तो कुदरत ने खुद बनाया है। शमा बताती है कि उनकी एक रिश्तेदार है उसने तो अपने सगे भाई से ही चुदवा लिया है।
और फिर मैंने भी सब कुछ सोच लिया ….
बचपन में मुझे बारिश में नहाना बहुत अच्छा लगता था। पर मेरी मम्मी तो मुझे बारिश में भीगने ही नहीं देती थी। बात दरअसल यह थी कि जब भी मैं बारिश में नहाती तो मुझे जोर की ठण्ड लग जाती और मैं बीमार पड़ जाती तो मम्मी बहुत ही गुस्सा होती। अब भी जब बारिश होती है तो मैं अपने आप को नहीं रोक पाती भले ही मुझे बाद में तकलीफ ही क्यों ना हो। और फिर सावन की बरसात तो मैं मिस कर ही नहीं सकती।
हमारा घर दो मंजिला है। ऊपर एक कमरा बना है और उसके साथ ही बाथरूम भी है। अगर कोई मेहमान आ जाए तो उसमें ही ठहर जाता है। प्रेम भैया को भी वही कमरा दिया है। वो इस कमरे में बिना किसी विघ्न बाधा के अपनी पढ़ाई लिखाई कर सकते हैं। उस समय रात के कोई 10.30 बजे होंगे। हम सभी ने खाना खा लिया था। मम्मी पापा सो गए थे। मैं प्रेम भैया के पास बैठी गप्प लगा रही थी। बाहर बारिश हो रही थी। मेरा जी बारिश में नहाने को मचलने लगा। मैंने प्रेम से कहा तो वो बोले “तुम्हें ठण्ड लग जायेगी और फिर मौसीजी बहुत गुस्सा होंगी !”
“ओह कुछ नहीं होता ! प्लीज भैया, आप भी आ जाओ ना ! बहुत मजा आएगा साथ नहाने में !”
और फिर हम दोनों ही बाहर आ गए। मैंने हलके पिस्ता रंग का टॉप और पतला सा कॉटन का पाजामा पहन रखा था। आप तो जानती ही हैं कि मैं रात को सोते समय ब्रा और पेंटी नहीं डालती। भैया ने भी कुरता पाजामा पहन रखा था। मैं कोई 2-3 साल बाद ही बारिश में नहा रही थी। नहाने में पहले तो मुझे बड़ा मजा आया पर बाद में ठण्ड के कारण मेरे दांत बजने लगे और मुझे छींके आनी शुरू हो गई। मेरे सारे कपड़े भीग चुके थे और गीले कपड़ों में मेरा सांचे में ढला बदन साफ़ नजर आ रहा था। मेरे गोल गोल उरोज भीगे शर्ट से साफ़ नजर आ रहे थे। भैया की घूरती आँखें मुझ से छुपी नहीं थी। भगवान् ने औरत जात को ये गुण तो दिया ही है कि वो आदमियों की नजरों को एक मिनट में ही पहचान लेती है, फिर भला मैं उनकी आँखों की चमक कैसी नहीं पहचानती ?
मुझे अपनी और देखते हुए पाकर भैया बोले, “मैंने तुम्हे मना किया था ना ! अब मौसीजी कितना नाराज होंगी ?”
“ओह भैया प्लीज मम्मी को मत बता … न … ओ … छीईईइ …..” मुझे जोर की छींक आ गई और उसके साथ ही मेरे उरोज टेनिस की गेंद की तरह उछले।
भैया मेरा बाजू पकड़ कर नीचे ले जाने लगे मैंने कहा, “नहीं, नीचे मम्मी देख लेंगी आपके कमरे में ही चलते हैं !” और हम लोग वापस कमरे के अन्दर आ गए। मेरे दांत बजते जा रहे थे भैया ने तौलिये से मेरा शरीर पोंछना शुरू कर दिया शरीर पोंछते हुए उनका हाथ मेरे उरोजों और नितम्बों से छू गया। मेरे शरीर में जैसे कोई बिजली सी दौड़ी। मैं तो रोमांच से ही भर उठी मेरा अंग अंग गीले कपड़ों में साफ़ झलक रहा था।
“ओह इन गीले कपड़ों को उतारना होगा… पर….. वो… तुम्हारे लिए सूखे कपड़े ?”
“कोई बात नहीं आपकी कोई लुंगी और शर्ट तो होंगी ?”
“आन … हाँ ” उन्होंने अपनी धुली हुई लुंगी और शर्ट मुझे दे दी। हम दोनों ने बाथरूम में जाकर कपड़े बदल लिए। ढीली शर्ट में मेरे उरोजों की घुन्डियाँ साफ़ दिख रही थी। गोल गोल संतरे जैसे मेरे उरोज तो इस समय तन कर खड़े क़यामत बने थे। भैया की नज़रें तो उन पर से हट ही नहीं रही थी। इतने में जोर से बिजली कड़की तो डर के मारे मैं भैया की ओर खिसक आई। मेरे दांत अब भी बज रहे थे।
भैया बोले,“तुमने तो जानबूझकर मुसीबत मोल ली है। लाओ, तुम्हारे हाथ और पैर के तलवे मल देता हूँ इससे तुम्हारी ठण्ड कम हो जायेगी !” और उन्होंने मेरे नाजुक हाथ अपने हाथों में ले लिए। मेरे लिए किसी मर्द का ये पहला स्पर्श था। मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ने लगी। भैया मेरे हाथ मलते जा रहे थे। मैंने कनखियों से देखा था उनका ‘वो’ कुतुबमीनार बन गया था। हे भगवान् ये तो कम से कम 7-8 इंच का तो जरूर होगा। उनकी साँसे गरम होती जा रही थी। मेरा भी यही हाल था। मेरे होंठ काँप रहे थे पर इस बार ठण्ड के कारण नहीं बल्कि रोमांच के कारण। पर मैंने ठण्ड का बहाना बनाए रखा।
फिर भैया बोले “मीनू लाओ तुम्हारे पैर के तलवे भी मल देता हूँ ”
मैं भी तो यही चाहती थी। मैं बेड से टेक लगाए उकडू बैठी थी। मैंने एक पैर थोडा सा आगे कर दिया। उन्होंने मेरे पैर के तलवों को मलना शुरू कर दिया। जैसे ही उन्होंने मेरा पैर थोड़ा सा ऊपर किया मेरी ढीली लुंगी नीचे हो गई। मैंने जान बूझ कर इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया। मैं जानती थी मेरी मुनिया अब उनको साफ़ दिख रही होगी। मैंने अधखुली आँखों से देखा भैया की कनपटी लाल हो गई है। थोडा सा पसीना भी आने लगा है। उनके होंठ भी कांपने से लगे हैं। भैया का बुरा हाल था। वो तो टकटकी लगाए मेरी जाँघों की और ही देखे जा रहे था। केले के पेड़ की तरह मेरी चिकनी जांघें और छोटे छोटे रेशमी बालों से लकदक मेरी पिक्की देख कर वो तो जैसे निहाल ही हो गए थे। और पिक्की की मोटी मोटी गुलाबी फांकें को देखकर तो उनकी आँखें जैसे फटी की फटी ही रह गई थी। उनके हाथ कांप रहे थे। मैं भी आँखे बंद किये रोमांच के सागर में गोते लगा रही थी। मैंने छेड़ने के अंदाज में उनसे कहा “भैया आपको भी ठण्ड लग रही है क्या ?”
“आन…. हाँ शायद ऐसा ही है !”
“पर ठण्ड में तो दांत बजते है, आपको तो पसीना आ रहा है ?”
“वो.. वो … ओह कुछ नहीं ” उनकी आँखें अब भी मेरी पिक्की की ओर ही थी। मैंने झट से अपना पैर खींचते हुए लुंगी से ढक लिया।
“ओह सॉरी ….” भैया की हालत तो अब देखने लायक थी।
“भैया ये चीटिंग है ?” मैंने झूटमूठ का गुस्सा किया।
“ओह सॉरी बाबा ! मैंने कुछ नहीं देखा !”
“तो फिर आप इतना घबरा क्यों रहे हैं ?” मेरी हंसी निकल गई।
“ओह.. आई एम… सॉरी !”
“अच्छा भैया एक बात पूछूं ?”
“क… क्या …?”
“सच बताना आपकी कोई गर्ल फ्रेंड है ?”
“अरे… वो … वो… नहीं तो … पर तुम ये क्यों पूछ रही हो ?”
“प्लीज बताओ ना भैया ?”
“अरे मैंने बताया ना कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है। मुझे तो पढ़ाई से ही फुर्सत नहीं मिलती। पर एक बात है ?”
वो क्या ?”
“तुम्हारी वो जो फ्रेंड है ना ! अरे वो ही जो सुबह आई थी ?”
“ओह… शमा ?”
“हाँ….”
“क्यों क्या बात है ?”
“यार … वो बहुत खूबसूरत है ?”
“ओह … तो मेरे भैया उस पर मर मिटे हैं ?” मैं हँसने लगी।
“नहीं ऐसी बात नहीं है। वैसे वो है लाजवाब !” भैया की आँखों में जैसे चमक सी आ गई थी।
“अरे उसका वीजा लग चुका है वो हाथ आने वाली नहीं है ?”
“ओह…”
“पर ऐसी क्या बात है उसमें ?”
“यार मीनू उसके बूब्स और नितम्ब तो कमाल के हैं” भैया बोले।
उनकी आंखों में अब लाल डोरे तैरने लगे थे। ये मर्द भी सभी एक जात के होते हैं. औरत की खूबसूरती तो उन्हें केवल नितम्बों और उरोजों में ही नजर आती है. मैंने अपने मन में कहा ‘एक बार मेरे देख लोगे तो सब कुछ भूल जाओगे” पर मैंने कहा “अच्छा मेरी फिगर कैसी है ?”
“अरे तुम तो हुस्न की मल्लिका हो अगर कोई फ़रिश्ता भी तुम्हारे भीगे बदन को देख ले तो जन्नत का रास्ता भूल जाए !”
जी में तो आया कह दूं ‘फिर तुम क्यों नहीं रास्ता भूल रहे हो’ पर मैंने उनकी आँखों में झांकते हुए कहा “क्या वाकई मैं इतनी खूबसूरत हूँ ?”
“सच्ची मीनू कभी कभी तो मैं ये सोचता हूँ अगर तुम मेरी मौसेरी बहन नहीं होती तो मैं किसी भी कीमत पर तुमसे शादी कर के छोड़ता …” उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा “ओह … पर ऐसा कहाँ संभव है ?”
“क्यों ?” मैंने अनजान बनाते हुए कहा। मैं उनकी उखड़ी हुई साँसे अच्छी तरह महसूस कर रही थी। उनका पाजामा तो तम्बू ही बना था।
“ओह … मीनू … सच कहता हूँ मैं इन तीन दिनों से तुम्हारे बारे में सोच सोच कर पागल सा हो गया हूँ। लगता है मैं सचमुच ही तुम्हें पर … प्रेम … ओह … चाहने लगा हूँ। पर ये सामाजिक बंधन भी हम जैसो की जान ही लेने के लिए बने है !” भैया की आवाज कांप रही थी।
“ओह ... मीनू … सच कहता हूँ मैं इन तीन दिनों से तुम्हारे बारे में सोच सोच कर पागल सा हो गया हूँ। लगता है मैं सचमुच ही तुम्हें पर ... प्रेम … ओह … चाहने लगा हूँ। पर ये सामाजिक बंधन भी हम जैसो की जान ही लेने के लिए बने है !” भैया की आवाज कांप रही थी।
“भैया क्या आपने कभी सोचा कि मैं आपके बारे में क्या सोचती हूँ ?”
“क… क्या मतलब ?” अब उनके चौंकने की बारी थी।
“हाँ भैया मैं भी आपसे प्रेम करने लगी हूँ !” मैंने अपनी नजरें झुका ली।
“ओह… मेरी मीनू मेरी मैना मेरी जान” और भैया मुझ से लिपट ही गए। उन्होंने मुझे अपने बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर एक चुम्बन ले लिया। आह ... वो प्यार का पहला चुम्बन मुझे अन्दर तक रोमांच से भिगो गया। मेरा तन मन सब कुछ तो उसी एक छुवन की लज्जत से सराबोर हो गया। मैंने भी अपने जलते होंठ उनके होंठों पर रख दिए।
मुझे नहीं पता कितनी देर हम लोग इसी तरह एक दूसरे को चूमते रहे। हम तो जैसे अपनी सुधबुध ही खो बैठे थे। मैं तो उनसे ऐसे लिपटी थी जैसे कोई लता किसी पेड़ से। बाहर जोर की बिजली कड़की तब हमें होश आया। भैया ने झट से उठ कर कमरे का दरवाजा बंद किया और फिर वापस आकर मुझे अपने आगोश में भर लिया।
“मीनू कहीं हम गलत तो नहीं कर रहे ?”
“ओह ... भैया अब कुछ मत सोचो। इस रात और इन हसीन लम्हों को यादगार बना लो। छोड़ो इन पुरानी दकियानूसी बातों को !”
और फिर ……………….
उन्होंने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया और मेरी लुंगी को खींचने लगे। मैंने कहा “नहीं पहले लाइट बंद करो !”
उन्होंने झट से लाइट बंद कर दी और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। खिड़की से हलकी रोशनी आ रही थी। अब उन्होंने अपने और मेरे कपड़े निकाल फेंके। अब हम दोनों ही एक दम नंगे थे। मेरी मुनिया तो कब की पानी छोड़ छोड़ कर पीहू पीहू कर रही थी। मैंने शर्म के मारे अपने दोनों हाथ अपनी मुनिया के ऊपर रख लिए।
“मीनू मेरी जान ! अब शर्म छोड़ो ! मुझे अपनी इस प्यारी मुनिया को प्रेम करने दो !”
प्रेम ने मेरे हाथ परे कर दिए। मैं चित्त लेटी थी। मेरी जांघें आपस में कसी हुई थी। एक अनजाने डर और रोमांच से मैं तो लबालब भरी हुई थी। उन्होंने अपना एक हाथ धीरे से मेरी पिक्की की केशर क्यारी पर फिराया। और फिर अपने जलते हुए होंठ मेरी मुनिया के होंठो पर जैसे ही रखे मेरी एक हलकी सी किलकारी निकल गई। फिर अपनी जीभ से मेरी मुनिया की गुलाबी पंखुडियों को चूम लिया और फिर उसे चाटना शुरू कर दिया तो मेरी बंद जांघें अपने आप खुलने लगी।
फिर उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी पिक्की की दोनों फांकों को चौड़ा किया। शहद की कुप्पी जैसी लाल गुलाबी रंगत वाली प्रेम रस में सराबोर हुई अनछुई पिक्की हलकी ‘पुट’ की आवाज के साथ खुल गई। उन्होंने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। मेरे मुंह से सहसा निकल पड़ा “उई ……. माँ …….” अरे अभी तो उन्होंने दो तीन बार ही जीभ फिराई थी मेरी पिक्की तो निहाल ही हो गई और अपने प्रेम रस की 4-5 बूंदें उन्हें समर्पित कर दी। वो तो मस्त होकर उसे चाट ही गए। मैं सीत्कार पर सीत्कार करने ली। मेरे पैर अपने आप ऊपर उठ गए और मैंने उनकी गर्दन के चारों और लपेट लिया। वो कभी मेरे नितम्बों को सहलाते कभी मेरे गोल मटोल उरोजों को दबाते। मैं तो सातवें आसमान पर थी।
“ओह... प्रेम बस करो ! मुझे कुछ होता जा रहा है।"
मेरा शरीर अकड़ने लगा और साँसे तेज होने लगी। मुझे लगा जैसे कहीं मैं अनजाने खुमार और उन्माद में डूब रही हूँ। मैंने उनके सिर के बालों को जोर से पकड़ लिया और अपनी पिक्की की और दबा दिया। और उसके साथ ही मेरी किलकारी निकल गई और मेरी पिक्की ने गरम गरम प्रेम रस की जैसे बौछार ही चालू कर दी। आह … इतना मजा तो कभी हस्तमैथुन करके भी नहीं आया था। शमा सच कह रही थी इस लज्जत (स्वाद) से अब तक मैं तो अनजान ही थी। प्रेम पूरा का पूरा रस चटखारे लेकर पी गया।
“ओह मेरी मैना ! मेरी जान ! मजा ही आ गया ” प्रेम ने उठते हुए कहा। मेरा शरीर अब भी रोमांच से काँप रहा था। वो मेरे ऊपर आ गए। और मेरे होंठों को चूसने लगे। उनके होंठों पर लगे मेरे प्रेम रस का नमकीन और कुछ खट्टा सा स्वाद मुझे भी मिल ही गया। वो कभी मेरे गालों को कभी मेरे होंठो को कभी गले को कभी उरोजों को चूमते ही जा रहे थे। फिर उन्होंने अपना मुंह मेरे अमृत कलशों (उरोजों) पर लगा दिया और उनकी चने के जितनी बड़ी निप्पल्स को चूसना चालू कर दिया। कभी वो एक उरोज को पूरा मुंह में भर लेते और चूसते और कभी दूसरे को। मेरी तो सीत्कार ही निकलती जा रही थी।
अचानक मेरा हाथ उनके ‘उस’ से टकराया। ओह… मुझे शर्म आ रही है उसका नाम लेते हुए। आप समझ रहे हैं ना। लगभग 7” लम्बा और 1 ½ “ मोटा उनका पप्पू तो अकड़ कर जैसे लोहे की रॉड ही बना था। उसका रंग सांवला सा था। वो तो ऐसे खड़ा था जैसे किसी बन्दूक की मोटी सी नाली हो और बस घोड़ा दबाने का इंतज़ार कर रहा हो. और सुपाड़ा तो जैसे कोई लाल टमाटर ही हो । मैंने आज पहली बार किसी का “वो” इतने नजदीक से देखा था। मैंने प्यार से उसे छुआ तो वो तो फुफ्कारे ही मारने लगा। मैंने धीरे धीरे प्यार से उसे सहलाना शुरू कर दिया तो उसने भी ठुमके लगाने चालू कर दिए। मैंने जब सुपाड़े पर अंगुली फिराई तो मुझे कुछ लेसदार सा चिपचिपा सा महसूस हुआ। शमा बताती है ये प्री कम होता है। कुछ नमकीन सा होता है और इसका स्वाद बहुत ही मजेदार होता है। मेरा जी तो कर रहा था कि उसे मुंह में ले लूं पर शर्म के मारे मैं उसे मुंह में नहीं ले पाई।
“मीनू मेरी जान क्या तुम तैयार हो ?” उन्होंने मेरे होंठ चूमते हुए पूछा।
“किसके लिये ?”
“ओह ये भी बताना पड़ेगा क्या ?”
“हाँ बताये बिना तो मैं कैसे समझूंगी ?”
“अब चुदाई करनी है मेरी मैना !” उन्होंने मेरी नाक पकड़ते हुए मेरे होंठों पर एक चुम्बन ले लिया।
“ओह… भैया आप बहुत गन्दा बोलते हो ?”
“अब चुदाई को तो चुदाई ही कहा जाएगा और क्या बोलूँ ?”
“नहीं …ये गन्दा शब्द है हम इसे प्रेम मिलन कहेंगे ‘वो’ नहीं ?”
“वो क्या ?”
“ओह भैया आप फिर… नहीं मुझे शर्म आती है” मैंने अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढांप लिया।
अब वो कहाँ रुकने वाले थे। उन्होंने मुझे जोर से अपनी बाहों में भर कर मेरे होंठ चूम लिए। और फिर एक हाथ बढा कर उन्होंने बेड की साइड ड्रावर से वैसलीन की डब्बी निकाली और एक अंगुली में क्रीम भर कर मेरी पिक्की के होंठो पर और छेद में लगा दी। मैं तो सिहर ही उठी रोमांच से। उन्होंने धीरे धीरे अपनी अंगुलियों से मेरी पिक्की की फांकों को मसलना शुरू कर दिया। फिर एक अंगुली मेरे रति-द्वार के छोटे से छेद में डाल दी। “ऊईई …. माँ.. आ ….” मुझे गुदगुदी सी हो रही थी। उन्होंने अब अंगुली अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी। मैं तो जैसे मदहोश ही हो गई। मेरे मुंह से तो बस आह … ओईई … ही निकलते जा रहा था। फिर उन्होंने अपने पप्पू को भी क्रीम से तर कर लिया और उसे मेरी पिक्की के मुंह पर रख दिया। वो तो बेचारी कब की तरस रही थी। उन्होंने कोई जल्दी नहीं की। मुझे बड़ी हैरानी हो रही थी ये इतनी देर क्यों कर रहे हैं। शमा तो कहती है की गुल तो एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार देता है।
प्रेम ने एक हाथ मेरी कमर के नीचे लगा लिया और एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे। उसने मेरे होंठ अपने होंठों में भर लिए। मेरी मुनिया तो कब की पीहू पीहू कर रही थी। उन्होंने एक जोर का सांस लिया और धीरे से एक धक्का लगाया। मेरी प्यारी मुनिया को चीरता हुए उनका पप्पू 3 इंच तक मेरी पिक्की में घुस गया और उसके साथ ही मेरी घुटी घुटी चीख निकल गई। मुझे लगा जैसे किसी ने लोहे की गरम सलाख मेरी पिक्की में ठोक दी हो। मुझे ऐसे लगा जैसे मेरी पिक्की की चमड़ी किसी ने चाकू से चीर दी है। मैं कसमसाने लगी। और जैसे ही मेरे होंठ उनके मुंह से छूटते मेरी हलकी सी चींख निकल गई। “ओह भैया…. मैं मर गई ……. म… म… मम्मी !”
“बस बस मेरी मैना अब दर्द ख़त्म ! बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो ! अब आगे मजा ही मजा है !”
“नहीं भैया बाहर निकाल लो प्लीज … मैं मर जाउंगी बहुत दर्द हो रहा है !”
“बस एक मिनट की बात है। प्लीज चुप करो। बस अब दर्द ख़त्म ! ”
हम लोग कोई 3-4 मिनट ऐसे ही एक दूजे की बाहों में लिपटे पड़े रहे और फिर तो जैसे कमाल ही हो गया। मेरा दर्द कम होता चला गया। आह ….. अब तो बस मजा ही मजा था। प्रेम धीरे धीरे धक्का लगाने लगे पर पूरा अन्दर नहीं किया।
मैंने कहा, “अब मत तरसाओ ! पूरा डाल दो !”
“क्या डाल दूँ ?”
“ओह भैया आप तो मुझे बेशर्म ही कर के छोडोगे। नहीं मैं इसका नाम नहीं ले सकती !”
“प्लीज बोलो ना ?” उन्होंने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में ले लिया और मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा।
“ये तो मेरा प्यारा मिट्ठू है बस अब तो आप खुश हैं ना ?” कहते हुए मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं।
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था और साँसें बेकाबू होती जा रही थी। मेरा तो रोम रोम ही पुलकित हो गया था। मैं तो जैसे मस्ती के सागर में ही डूबी थी।
अचानक उन्होंने मुझे जोर से अपनी बाहों में भींच लिया। मैंने भी अपने नितम्ब उछालने शुरू कर दिए। पर मुझे क्या पता था अभी तो असली काम बाकी था। प्रेम एक मिनट के लिए रुका और फिर बोला “देखो मेरी जान थोड़ा सा दर्द और सहन करना होगा !”
“ओह प्रेम अब कुछ मत पूछो अब डाल दो पूरा अन्दर ! अब दर्द की चिंता मत करो ! तुम्हारे लिए मैं सब सहन कर लूंगी !”
फिर उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लिया और एक जोर का धक्का लगाया। उनका 7” लम्बा पप्पू मेरी मुनिया की झिल्ली को रोंदता हुआ अन्दर समा गया। मेरे मुंह से जोर की चीख और आँखों से आंसू दोनों एक साथ निकल पड़े। प्रेम तो पक्के गुरु थे। इस से पहले कि मेरी चीख हवा में गूंजे, उन्होंने मेरा मुंह अपने हाथ से ढक दिया और मैं तो बस गूं गूं करती ही रह गई। बाहर बहुत जोर से बिजली कड़की लेकिन मुझे लगा कि मुझे जितने जोर का झटका लगा है वो उस बिजली से कम नहीं था। मुझे लगा मेरी पिक्की से गरम गरम सा कुछ निकल रहा है। मुझे तो बाद में पता चला वो तो मेरी पिक्की की सील टूटने से निकला खून था जो पूरी बेडशीट को ही भिगो गया। मैंने उनकी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए जिससे उनका हल्का सा खून निकल आया। पर इस खून और दर्द की किसे परवाह थी।
कोई 4-5 मिनट हम इसी तरह शांत पड़े रहे। फिर जब उनका ‘वो’ (अरे यार पप्पू) अन्दर एडजस्ट हो गया तो मेरी पिक्की ने भी रोना धोना बंद करके प्रेम रस बहाना चालू कर दिया। मेरी पिक्की अब संकोचन करने लगी थी। उनका पप्पू भी अन्दर मस्त हुआ ठुमके लगाने लगा। अब प्रेम ने धीरे धीरे धक्के लगाने चालू कर दिए। मैं भी अपने नितम्ब उठा उठा कर उनका साथ देने लगी। पता नहीं कितनी देर वो अपने पप्पू को अन्दर बाहर करते रहे। समय की परवाह किसे थी। मैं तो बस यही चाह रही थी हमारे प्रेम के ये सुनहरे पल कभी ख़तम ही न हों। मेरे मुंह से आह… ओईई …. या.. आ.. आ.. की आवाजें निकालने लगी थी और मेरी पिक्की से फच फच की आवाजें आनी शुरू हो गई थी। मेरा शरीर एक बार फिर अकड़ने लगा और इस से पहले की मैं कुछ समझती या करती मेरी पिक्की ने पानी छोड़ दिया।
प्रेम धक्के लगता जा रहा था। मैंने अपने पैरों को ऊपर उठा कर प्रेम की कमर से कैंची की तरह जकड़ लिया। अब वो धक्के नहीं लगा पा रहे थे। वो कुछ देर ऐसे ही मेरे ऊपर पड़े रहे। मैं तो प्रेम रस में डूबी रोमांच के सागर में गोते लगा रही थी। फिर मैंने धीरे धीरे अपने पैर नीचे कर लिए। हमें कोई 15 मिनट तो जरूर हो गए होंगे। प्रेम ने फिर जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उनके मुंह से अजीब सी गुरर्र.. गु….र…र्र की आवाज निकलने लगी थी। मेरी पिक्की से भी अब फच .. फच .. की आवाजें आनी शुरू हो गई थी। इस मधुर संगीत को सुनकर मैं तो तृप्त ही होती जा रही थी। इस अनोखे स्वाद से अब तक तो मैं अनजान ही थी। इसके बदले में अगर स्वर्ग भी मिले तो मैं ना जाऊं।
“मेरी मैना अब मैं भी जाने वाला हूँ !” उनके धक्को की रफ़्तार अचानक तेज हो गई।
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उन्हें जोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया। और इसके साथ ही उनके पप्पू ने एक... दो.. तीन.. चार… न जाने कितनी पिचकारियाँ छोड़ दी। मेरी पिक्की तो उनके गरम और गाढ़े वीर्य से लबालब भर गई। मेरी पिक्की भला क्यों पीछे रहती उसने भी एक बार फिर काम रस छोड़ दिया।
बाहर बारिश अब बंद हो गई थी। मैं शर्ट और लुंगी पहन कर नीचे भाग आई।
प्रेम तो मुझे मीनल से मैना बना कर चले गए पर मैं आज भी उन लम्हों को याद करके रोमांच से भर जाती हूँ। लेकिन बाद में मेरे दिल में एक हूक सी उठती है और मेरी आँखों से आंसू छलक पड़ते हैं। आप शायद इन बातों को नहीं समझेंगी। प्रेम की याद में मैं कितना रोती और तड़फती हूँ आप क्या जाने। वो तो बस सावन में आग लगा कर चला गया। काश कोई मेरे इन आंसुओं की कीमत समझे और इस आने वाले सावन में मेरे भीगे बदन को अपने सीने से लगा ले।

Friday, 15 April 2011

नीता की मां माया की चुदाई

थोड़ी ही देर बाद, नीता की मम्मी आई. बोली, नीता आज आने में थोड़ी देर हो गई है. बेटी तुम्हें दिक्कत तो नहीं हुई.नीता राकेश की ओर देखकर मुस्कुराती हुई बोली, नहीं मम्मी, राकेश मेरा काफी ख्यालरखता है.माया समझ गई कि उसकी बेटी जवान हो गई है.नीता बहुत खुश थी.माया नीता से बोली, नीता एक अच्छी फिल्म लगी है, चलोगी देखने.नीता बोली, मम्मी राकेश के साथ चली जाओ, आज मन कुछ ठीक नहीं है.माया ने आज शावर में पूरी तरह नंगी होकर स्नान किया. तेरह वर्षों बाद बूर के बालसाफ किए. अपनी बूर को गौर से देखा. अभी भी उसकी बूर उन्नीस साल की किसीकुवारी की तरह जवान दिख रही थी. उसे पछतावा हो रहा था कि आखिर उसने किसलिएअपनी बूर को चुदाई के सुख से वंचित रहा. उसने जालीदार पैंटी और ब्रा में देखा, बहुतसेक्सी लग रही थी. हालांकि उसकी उम्र चौंतीस से कम नहीं थी मगर वह पच्चीस सेज्यादा की नहीं लग रही थी. गहरे हरे रंग की सारी ब्लाऊज और साड़ी में सिमटी उसकीछरहरी काया बड़ी ही मादक लग रही था. राकेश ने माया को इतनी सेक्सी पहली बारदेखा था. उसने देखा तो बस देखता रह गया. सोचा, यदि माया देवी को चोदा जाय तोकितना आनंद आएगा. सच में शादी शुदा महिला चुदाई कला में माहिर होती है साथ हीउसका अंग-प्रत्यंग गदराया हुआ होता है, जिससे उसे चोदने में अलग ही आनंद आता है.दोनों ने फिल्म देखी. लौटती में माया ने अपने लिए ब्रा और पैंटी का एक जोड़ा खरीदा.लौटते-लौटते रात के दस बज चुके थे. माया बोली- राकेश, थोड़ी थकान सी लग रही है.राकेश बोला, जी, मैडम जी, तेल लगाकर मालिश कर दूं.माया तैयार हो गई. राकेश मालिश करने लगा.माया ने पूछा, राकेश, तूने आज नीता के साथ जो कुछ किया था क्या उसने करने कहाथा.जी, हां मैडम, उन्होंने मुझे मजबूर किया. उन्होंने कहा, यदि तुम नहीं करोगे तो तुम्हेंनौकरी से निकलवा दूंगी.माया ने सोचा, यदि जवान बेटी को डॉटती फटकारती है तो बाहर जाकर किसी और सेकरवाएगी. आखिरकार घर की बात घर में रहे तो अच्छा है.माया ने पूछा, अगली बार करने कहे तो कडोम लगाकर करना.राकेश बोला, मैडम, मैंने तो कई बार कहा था, लेकिन वो कह रही थी कि कंडोम लगाकरउतना आनंद नहीं आता है.माया बोली, जो भी करना, जरा धीरे करना. अभी बच्ची है.राकेश बोला, जी, मैडम.राकेश माया की पीठ में तेल लगाकर हौले-हौले सहलाने लगा. वर्षों बात पुरूष के हाथ नेमाया के जिस्म को छुआ था, माया के पूरे शरीर में करोड़ों चीटिंयां रेंगने लगी.जवान औरत के गोरे चिकने जिस्म को छूकर राकेश का खून गर्म होने लगा.राकेश का हाथ माया के ब्लाऊज के अंदर घूसने की कोशिश करने लगी. माया ने कहा, राकेश, ब्लाऊज को हुक खोल दो.इसके बाद तो राकेश ने सिर्फ ब्लाऊज ही नहीं, ब्रा का हुक भी खोल दिया और माया कीचुच्चियों को पकड़कर दबाने लगा. माया मदहोश होने लगी. वर्षों बाद उसे जवानी का सुखमिल रहा था वह जल्दी ही मदमस्त हो उठी, मगर राकेश माया जैसे खूवसूरत और जवानऔरत को यूं ही चोद देना नहीं चाहता था. माया के होठों को होठों में लेकर मस्ती मेंचूसने लगा. माया भी राकेश के होठों को चूसने लगी. माया बेहद सेक्सी महिला थी. वहअपने पति से खूब चुदवाती थी.माया के नरम होठों का दबाव पड़ते ही राकेश के शरीर का खून वाष्प बनकर उड़ने लगा. राकेश नीता की बड़ी-बड़ी पुष्ठ चुच्चियों पर झुक गया और चुंबनों की बौछार करते हुए बायींचुचुक को मुंह में भर लिया. माया पूरी मस्ती में जोर से सीत्कार उठी.राकेश ने माया को पीठ के बल लिटा दिया.कुछ देर के लिए माया को लगा कि राकेश उससे अलग हो गया है. अगले ही क्षण उसनेराकेश की उपस्थिति अपने बायें पैर के अंगूठों में महसूस की.राकेश ने माया के बायें अगूठे पर एक गहरा चुंबन दिया. मस्तानी माया जोर से सीत्कारउठी. सीत्कार सुनकर नीता अपने कमरे से बाहर आई. अधखुली खिड़की से सब कुछ देखनेलगी.राकेश ने माया की साड़ी को थोड़ो ऊपर खिसका दिया और माया के टांगों की चिकनीपिंडलियों को चूमने लगा. माया मस्ती में सिसकियां भरती रही.राकेश ने साड़ी को थोड़ा उठाया और घुटनों को प्यार से चूमा.साड़ी को थोड़ा खिसकाया और कदली खंभ सी चिकनी और पुष्ट जांघों पर चुंबनों की बौछारशुरू कर दी.माया की जंघाये थरथराने लगी, लेकिन राकेश ने चुबनों की झड़ी लगानी जारी रखी.साड़ी को थोड़ा ऊपर उठाया, थोड़ा और ऊपर, पारदर्शी पैंटी में माया की मस्तानी बूर कोदेखकर राकेश पागल हो उठा, बोला, हाय मेरी रानी और साड़ी को कमर से ढीला कर उसेअलग कर दिया और बूर पर झुक गया और पागलों की तरह चूमने लगा. माया मस्ती मेंसीत्कारती हुई राकेश के सिर को अपनी टांगों से बांध लिया. राकेश माया की प्यारी बूरको काफी देर तक चूमता रहा. उसका हाथ ऊपर बढ़ने लगा. बढ़कर माया की चुच्चियों सेखेलने लगा. चुच्चियों से खेलते हुए उसने माया की चुचुक को चुटकी में पकड़कर मसलनेलगा. चुचुक तनकर मस्त हो चुकी थी, मस्ताई हुई चुचुक को मसलने में राकेश को खूबमजा आ रहा था.माया मदहोश होकर बोली, राकेश प्लीज अब और बर्दास्त नहीं होता.राकेश ने माया के शरीर से पैंटी हटाकर उसे पूर्ण नग्न कर दिया.उसकी मस्तानी बूर पर लंड टिकाकर माया को बांहों में भर लिया.होठों को चूसते हुए लंड बूर में पेल दिया. राकेश का विशाल लंड बूर में जाते ही मायाचिहुंक उठी, ऊई मां मैं मर गई.पर राकेश कहां मानने वाला था. उसने माया की चुच्चियों को प्यार से दबाते हुए होठों कोचूसने लगा.माया जल्द ही मस्त हो उठी. राकेश ने माया की पतली कमर को हथेलियों में थामकरधीरे-धीरे चोदना शुरू किया. माया पूरे तेरह साल बाद चुदा रही थी, राकेश उसके पति कीतरह बड़े ही प्यार से चोद रहा था. बस राकेश का लंड उसे पति के लंड से दो इंच बड़ाथा. इस वजह से राकेश की चुदाई ने उसके गर्भाशय में हलचल पैदा कर दी. माया पागलहुई जा रही था.राकेश को माया की चुदाई से बहुत ही आनंद मिल रहा था. माया परिपक्व महिला थी, इसलिए चुदाई में पूरा सहयोग कर रही था. राकेश पूरी मस्ती में माया को चोद रहा था.माया ने सोचा अगर राकेश यू ही चोदता रहा तो जल्दी झड़ जाएगा, इसलिए राकेश सेकहा, राकेश बाबू अब थोड़ा धीरे होइये.राकेश थम गया.दोंनो के बीच एकबार फिर चुंबन और आलिंगन का दौर शुरू हुआ. माया के होठों को चूसतेहुए राकेश उसकी मादक चुच्चियों से खेलने लगा. चुच्चियों पर चुंबनों की बारिश और फिरचुचुकों को चूसने से माया मदहोश हो उठी.माया ने कहा, राकेश अब फिर से अपना काम शुरू करो,राकेश फिर उसी मस्ती से माया को चोदने लगा. माया की मदहोश नर्म मुलायम चुच्चियांमाया की छाती से चिपक कर उसे महान सुख दे रही थी. वहीं माया की बूर उसके लंड कोप्यार से चूम रही थी. राकेश पूरी स्पीड में माया को चोदने लगा. माया को पूरा आनंदमिल रहा था. माया बोली, चोदो मेरे राजा, और जोर से चोदो. राकेश समझ गया किमाया अब झड़ने वाली है. वह और भी तल्लीनता से उसकी चुदाई करने लगा. लंड पूरीमस्ती में बूर के अंदर आ-जा रहा था.दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे. फिर भी माया राकेश के शरीर में छिपकली के भांतिचिपकी जा रही थी. एक जोर दार किलकारी भरती हुई माया राकेश की छाती से चिपकगई.राकेश भी तेज दौड़कर थके घोड़ की तरह माया की चुच्चियों के बीच सिर रखकर शांत होगया.थोड़ी देर के बाद दोनों सचेत हुए. चुंबन आलिंगन का दौर फिर से शुरू हुआ.माया बोली, राकेश, पिछले तेरह सालों में मैं तो भूल ही गई थी कि संभोग सुख भी कोईसुख होता है. आज तूने हमें ये सुख देकर इस सुख का अहसास करा दिया है अब तो मैंतेरे बिन एक पल भी नहीं रह सकती हूं.राकेश बोला, आप जैसी महिला का प्यार पाने के लिए सिर भी चढ़ाना पड़े तो सौदा सस्ताहै.माया बोली, तो समझो, आज से माया देवी का प्यार तेरे लिए, और राकेश को चूमनेलगी, बोली, जल्द से राकेश के लिए कोई अच्छा सा लड़का ढूढ़कर उसकी शादी करवा देतेहैं फिर हम दोनों हमेशा साथ रहेंगे. एक बार फिर दोनों ने जमकर चुदाई की.माया के सो जाने के बाद राकेश की याद गई. देखा तो नीता के कमरे का दरवाजा खुलाहुआ था. वह अंदर दाखिल हुआ, नीता गहरी नींद में सोई हुई थी. राकेश ने प्यार सेनीता के होठों को चूम लिया. नीता की नींद खुल गई. उसने उसे बांहों में भर लिया. इसबार नीता ने खुलकर राकेश का साथ दिया. दोनों देर रात तक चुदाई करते रहे.माया ने नीता की शादी करवा दी. नीता का पति भी चोदने में एक्सपर्ट था. पहली हीरात नीता की जमकर चुदाई की. नीता अपने पति से चुदवाकर राकेश को भूल गई. इधरमाया देवी ने मनाली में घर खरीद लिया. वहीं राकेश के साथ रहकर मस्ती में चुदाई करनेलगी.

दीवानगी यानी नीता की चुदाई


“छोड़ो मुझे, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की” नीता ने खुद को राकेश की बांहों से आजाद होने की कोशिश करते हुए कहा.

“ऐसा न कहो, नीता रानी, देखो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं”

“छोड़ते हो या शोर मचाऊं"”””’ नीता ने धमकाते हुए कहा.

“प्लीज नीता, ऐसा मत करना, ऐसा करने से बदनामी तुम्हारी भी होगी, मगर इस गरीब के पेट पर लात पड़ जाएगी” राकेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

नीता भी अभी-अभी जवानी की दहलीज पर पर चढ़ी थी, उसके यौवन के उभार और गोलाइयां कयामत ढा रही थी. उसने अपनी नवविवाहिता सहेलियों से सुहागरात की रंगीन कहानियां सुन रखी थी. उसे भी अपने होने वाले पति के प्यार के बारे में सोचकर रोमांच होता था, लेकिन उसन सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका ही नौकर उसके ही घर में उसे मजबूर कर देगा. राकेश की बांहों में नीता को गर्माहत महसूस होने लगी.

उसने राकेश से कहा, "अभी मम्मी के आने का समय है, अभी छोड़ दो, किसी रोज फुरसत में ये प्यार का खेल खेलेंगे"

राकेश को बात बनते दिखी, ऐसे में नीता जैसी सत्रह साल की मदमस्त जवानी को राकेश कहां छोड़ने वाला था.

वो बोला, "अभी उनके आने में घंटे भर की देर है और हम बीस से पच्चीस मिनट में फ्रैश हो जाएंगे"”’

नीता समझ गई कि राकेश उसे चोदे बिना छोड़ने वाला नहीं है, इसलिए वह बोली, जब तुम मानोगे ही नहीं तो जो भी करना हो, जल्दी कर लो, वर्ना…

वर्ना यही की मम्मी आ जाएगी, आपकी मम्मी मोम की गुड़िया थोड़े हैं वो भी तो.., राकेश ने बात काटते हुए कहा.

नीता बीच ही में बोल पड़ी, अपना काम करोगे या..

राकेश ने कहा, सॉरी मैडम, और नीता की गोलाइयों को हौले-हौले सहलाने लगा.

राकेश पक्का खिलाड़ी था. उसका मानना था कि एक बार लड़की को चोदकर संतुष्ट कर दिया जाए तो वह हमेशा चुदवाने के लिए तैयार रहती है. नीता पूरी तरह अनछुई लड़की थी, इसलिए राकेश उसे चोदने से पहले अच्छी तरह तैयार कर लेना चाहता था.

राकेश ने नीता के होठों को चूमते हुए शर्ट के ऊपर से ही उसकी बड़ी-बड़ी मस्त चुच्चियों को दबाने लगा.

चुच्चियों पर पुरूष का हाथ लगते ही नीता मस्त होने लगी. राकेश ने शर्ट के बटन को खोलकर शर्ट को नीता शरीर से अलग कर दिया. राकेश के सामने डिजाइनर ब्रा में कैद नीता की गदराई हुई मादक चुच्चियां थी, राकेश ने नीता की चुच्चियों को मस्ती में दबाते हुए उसके होठों को चूमने लगा.

तब नीता भी मस्त हो चुकी थी, उसे भी मजा आने लगा था, उसने राकेश के होठों को अपने होठों के मध्य दबाकर चूसने लगी.

नीता के इस सहयोग से राकेश का जोश और भी बढ़ गया, उसने नीता के ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को शरीर से अलग कर दिया और भावोन्मत्त होकर एकटक से नीता की उत्तेजक चुच्चियों को देखने लगा. कुछ ही देर बाद नीता बोली, ऐसे क्या देख रहे हो.

राकेश ने कोई जवाब नहीं दिया. वह नीता की कामकलशों पर झुक गया और चुंबनों की झड़ी लगाते हुए बायी चुचुक को मुंह में भर लिया. नीता मदहोश होकर जोरों से सीत्कार उठी. राकेश बारी-बारी से कामकलशों का कामरस पीता रहा.

राकेश का हाथ नीता के चिकने नरम सपाट पेट से होते हुए नाभि के नीचे तक जा पहुंचा. राकेश की बढ़ती हरकतों को रोकने की कोई वजह नीता को नहीं दिख रही थी.

राकेश ने नीता के जिंस के काज से बटन निकाल कर जिप को नीचे खींच दिया और जिंस को नीचे खींच दिया. नीता ने उसे हाथ को रोकने की असफल कोशिश करते हुए कहा, प्लीज, राकेश, और आगे मत बढ़ो.

मगर राकेश चोदे बिना छोड़ने वाला कहां था. उसने नीता की पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया. नीता के अद्ध-गोलीय मांसल नितंबों को सहलाते हुए पूरी ताकत से अपनी कमर की और खींचा. कोई बेलनाकार ठोस वस्तु नीता के नाभि के नीचे जांघों के मध्य टकराई. नीता को समझते देर नहीं लगी कि यह राकेश का लंड और जो उसकी बूर में घुसकर चोदने के लिए बेकरार है.

चुदाई की कल्पना कर नीता मस्ती में सीत्कार उठी.

तब तक राकेश का हाथ आगे आ चुका था. नीता के भग प्रदेश का सर्वेक्षण किया और तर्जनी अंगुली अंगुली नीता की बूर में घुसानी चाही, लेकिन नीता ने राकेश का हाथ पकड़ लिया और बोली, प्लीज, राकेश, प्लीज अब और नहीं.

नीता पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी.

राकेश ने उसके शरीर से शेष बचे कपड़े को उतार दिया और फर्श पर बिछे चादर पर पीठ के बल लिटा दिया.

राकेश ने अपना पैजामा खोल दिया. वह जांघिया पहने हुए नहीं था, इसलिए पैजामा खुलते ही हथियार बाहर आ गया. काफी लंबा और मोटा था राकेश का लंड. नीता ने एक नजर राकेश के लंड को देखा और इसके बाद आंखे बंद कर ली.

राकेश ने नीता की टांगो को फैला दिया और स्वयं जांघों के बीच उकडू बैठ गया और झुककर नीता की बूर को चूम लिया. नीता मस्ती में जोर से सीत्कार उठी.

राकेश ने सोचा, मदहोश हो चुकी नीता को अब और तड़पाना ठीक नहीं और उसने अपना लंड नीता के बूर की छेद में टिका दिया और नीता के ऊपर सवार हो गया.

नीता को बांहों में कस लिया और कमर पर दबाव डाला. बूर को चीरते हुए लंड अंदर घूसने लगा.

नीता की यह पहली चुदाई थी, इसलिए राकेश का लंड जाते ही वह दर्द के मारे चीख पड़ी, ऊई मां, मैं मर गई, राकेश प्लीज, मुझे छोड़ दो, मैं मर जाऊंगी.

राकेश ने बंधन ढीला कर दिया और नीता की चुच्चियों को दबाते हुए होठों को चूसने लगा. कुछ ही देर बाद उसका दर्द रफ्फू चक्कर हो गया.

बूर में राकेश के लंड की उपस्थिति नीता को सुखदायक लगा. उसने कमर उचकाकर चुदाई शुरू करने के लिए कहा. राकेश ने नीता के कमर को दांये हाथ से जकड़ लिया और बांये हाथ से नीता के कमसिन शरीर को बांधकर धीरे-धीरे चोदना शुरू किया. बूर में लंड के सुखदायी घर्षण से नीता सातवें आसमान में सैर करने लगी.

नीता भी नीचे से कमर उचकाने लगी, राकेश समझ गया कि नीता चुदाई का भरपूर आनंद ले रही है. उसने चुदाई का स्पीड बढ़ाते हुए पूछा, कैसा लग रहा है मेरी रानी.

नीता ने मदहोशी में कहा, ऐसा लग रहा है जैसे कि जन्नत की सैर कर रही हूं. बस यूं ही चोदते रहो मेरे राजा.

नीता के मुंह से ऐसी बात सुनकर राकेश दुगुने स्पीड से नीता की चुदाई करने लगा.

नीता के मुंह से आह्लाद भरे शब्द निकलने लगे.

राकेश समझ गया कि नीता के झड़ने का वक्त आ गया है.

दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे, फिर भी नीता राकेश के शरीर में छिपकली के भांति चिपकती जा रही थी. नीता की मुलायम चुच्चियां राकेश की छाती से चिपटकर उसे महान सुख दे रही थी.

राकेश फुल स्पीड में नीता की चुदाई कर रहा था. उसे लगा कि वह भी अब झड़ने के करीब है. तभी नीता का बंधन ढीला पड़ने लगा, राकेश भी पांच-छह जोरदार धक्के लगाने के बाद नीता की चुच्चियों पर औेंध गया. कुछ देर तक दोनों यूं ही अचेतावस्था में पड़े रहे.

उसी वक्त नीता की मम्मी आ गयी. नीता को अपने कमरे में नहीं देख इधर उधर तलाश करने लगी. राकेश का कमरा अंदर से बंद था. खिड़की का ऊपरी पल्ला खुला हुआ था. अंदर झांककर देखा तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन सब कुछ सामने था. राकेश- नीता संभोग का चरम-सुख पाकर आलस्य वश एक-दूसरे की बांहों में शिथिल पड़े थे. राकेश और नीता दोनों ही पूरी तरह नंगे थे. नीता नीचे पीठ के बल लेटी थी. राकेश के पूरा लंड नीता की बूर में था.

कुछ देर बाद दोनों सचेत हुए. नीता ने राकेश की ओर देखकर मुस्कुराया. नीता बोली, सच राकेश, सपने में भी नहीं सोचा था कि इसमें इतना आनंद आता है.

राकेश ने नीता की चुच्चियों को दबाते हुए पूछा, बहुत मजा आया मेरी रानी?

नीता बोली, सच मेरे राजा. नीता ने राकेश के होठों को होठों में भरकर चूसना शुरू कर दिया.

राकेश नीता की चुच्चियों को प्यार पूर्वक सहलाया और उठने की कोशिश की, अभी छोड़ के कहां जा रहा है जालिम, कुछ देर और जिया तो जुड़ा दे.

मैडम अब उठो भी, मम्मीजी के आने का वक्त हो गया है.

नीता अलसायी हुई सी बोली, होने दो, क्या मम्मी को पता नहीं है कि उनकी बेटी जवान हो गई है.

माया देवी को विश्वास नहीं हो रहा है कि ये उनकी बेटी के शब्द हैं.

माया को अब पछतावा हो रहा है कि उसने खुद को दुनिया के सबसे बड़े सुख से अलग क्यों रखा. जिस वक्त उसके पति की मौत हुई, उसकी उम्र महज इक्कीस साल थी. अपनी चार साल की बेटी के लिए उसने शादी नहीं की. बेटी को कोई गलत संगत नहीं लगे, इसके लिए उन्होंने खुद तो दुनिया के सभी सुख से अपने को वंचित रखा. लेकिन उसके त्याग का सिला उसे क्या मिला, उसकी बेटी एक नौकर की बांहों में पड़ी हुई है. उसे लगा कि उनकी बेटी गलत संगति का शिकार हुई है. उसकी सहेलियों ने बताए होंगे सेक्स में इतना आनंद मिलता है.

माया ने खुद को आइने में देखा, उसने महसूस किया कि वो आज भी उतनी खूबसूरत हैं जितनी दस साल पहले थी, वैधव्य ब्रह्मचर्य ने उसके शरीर में एक अलग ही तेज भर दिया है. उन्होंने अपनी चुच्चियों को देखा. उन्हें लगा कि उनकी चुच्चियां अभी भी किसी युवा पुरूष को पागल कर सकती है.

उधर, राकेश का लंड फिर नीता की बूर में कार्रवाई करने के लिए तत्पर हो उठा. राकेश बोला, एकबार और खेंले. नीता बोली, जान लोगे इस नाजुक जान की.

दोनों फ्रैश हो गए. बाहर आए. नीता ने देखा, मम्मी अभी तक नहीं आई है.

Thursday, 14 April 2011

सानिया की चुदाई भाग-7

मैंने उसकी बात पर ध्यान न दे सानिया के मोहक, नशीले बदन पर ध्यान दिया और बोला-"छोड़ साले अब ये बकवास और देख कि बेटी कैसे मस्त हो रही है इन मादर्चोदों की करतुतों पर"। सच, सानिया एक दम से फ़िदा थी अपने इन तीन विदेशी चाहनेवालों पर। वो सब भी साले उसके बदन को कब, कहाँ, कैसे मसल रहे थे यह सब तो मुझे बाद में ठीक से पता चला जब एलिशा की बनाई विडियो हमने देखी। जल्द हीं सानिया को सीधा लिटा कर सब उसकी चुदाई शुरु कर दिए। सबसे पहले एडविन ने उसकी बूर में अपना लन्ड ठाँसा, २५-३० धक्के के बाद वो अपना बाहर निकाला तो बिल सानिया की बूर में अपना लन्ड पेला और जब वो ३५-३० धक्के के बाद हटा तो जैक ने उसकी खुली हुई चूत में अपना लन्ड घुसेड़ दिया। इस तरह से तीनों बारी-बारी से लगातार करीब आधे घंटे तक उसके चूत को रगड़ते रहे, वो अब कराह उठी थी। उसकी मस्ती सब निकल गई थी और अब उस साली के बदन को भोगा जा रहा था। हम सब ने उसको चोदा था आज तक, आज उसको इन तीनों हरामियों ने बताया कि कैसे एक जवान लड़की की जवानी को भोगा जाता है मर्दों के द्वारा। अब वो अपनी टांग हवा में उठाए-उठाए थक गई थी और बार-बार कोशिश कर रही थी कि थोड़ा आराम करे, पर वो तीनों साले कहाँ मानने वाले थे। तीनों बारी-बारी कर रहे थे सो उन में से कोई अभी तक झड़ा भी नहीं था और हमारी प्यारी सानिया का सारा कस-बल निकल गया था।ऐसा तो आज तक उसके साथ हुआ नहीं था। वो अब चाह रही थी कि वो सब थोड़ा रुके, पर....बार-बार उसकी नजर हम सब से मिलती और उसकी आँख हमसे मदद चाहती, पर अब तो जमील भी साली को ऐसे चुदाते देख सिर्फ़ मजा लुट रहा था। मैं तो ऐसे कर रहा था जैसे मैं कुछ समझ हीं नहीं रहा हूँ, पर समझ तो सबसे ज्यादा मैं ही रहा था, असल में सब तो मेरा हीं किया धरा था। वैसे इसमें मेरा भी कोई खास दोष नहीं था। शुरुआत तो उसी साली सनिया ने की थी। मैं तो उसके बारे में सोच-सोच कर मूठ हीं मारता था, पर वही साली अपना ब्रा-पैन्टी मेरे बाथरुम में छोड़-छोड़ कर मुझे हिन्ट की कि मैं उसके बदन की तरफ़ आकर्षित हो जाऊँ, फ़िर मेरे जैसा चुदक्कड़ को जब वो खुद मौका दी कि मैं एक रंडी उसके सामने चोदूँ, और मेरी किस्मत से मुझे रागिनी जैसी बच्ची की उमर की ताजा-ताजा मंडी में आई रंडी मिली तो मैं मौका क्यों जाने देता। यही सब सोचता हुआ मैं अपना लन्ड सहलाते हुए उसकी चुदाई के देख कर मस्त हो रहा था।खैर अब तीनों सानिया के उपर से हटे और हमें आने का न्योता दिया। सानिया को वो सब घोड़ी बनाए हुए थे और उसकी बूर और गाँड़ दोनों की छेद पुरा खुली हुई थी। दोनों छेद लाल भभूका हो गया था। जब ऎड्विन ने दुबारा हमें ईशारा किया तो मैं उठ गया और अपने को नीचे की तरफ़ से नंगा किया। मेरा लन्ड वैसे भी यह सब देख फ़नफ़नाया हुआ था। तभी एक घोर आश्चर्य की बात हुई। जमील साला भी खड़ा हो गया था अपनी बेटी की घुड़्सवारी करने के लिए। हरामजादी सानिया को जब लगा कि अब हम-दोनों उसकी ठुकाई करेंगे, साली अपना तकलीफ़ सब भूल गई और मुस्कुराई। जमील को नंगा होते देख सब ने तालियाँ बजाई। जमील भी थोड़ा लजाया पर अब उसके भीतर का मर्द जागा हुआ था और जब सामने ऐसी कुतिया अपना नंगा नाच दिखा रही हो तो किस मादरचोद में दम है कि शान्त बैठा रहे? खैर जैसे हीं मैं और जमील सानिया की तरफ़ बढ़े कि बिल को अचानक कुछ याद आया और वो एकदम से बोला-"वेट, लेट अस गेट दिस स्लट वन मोर राऊन्ड विद अस. दिस टाईम वी विल लेट हर फ़ील डबल पेनेट्रेशन इन हर पस्सी...कमोन एड्विन, लेट हर गेट दी टेस्ट ओफ़ दिस टू। (रुको, हमें अभी इस रंडी के साथ एक बार और मजा लेने दो. इस बार हम उसकी चूत को दो लन्डों का मजा देंगे..आ जाओ एड्विन, इसे यह मजा भी करा दें)।जमील को यह सब सुन कर अपनी बेटी पर दया आई-"नो, नौट दिस, माई गर्ल कान्ट टेक दिस काईन्ड, शी इज सो हेल्पलेस नाउ यू कैन सी दैट, शी इज इन पेन (नहीं, यह नहीं मेरी बेटी ऐसा नहीं करा पाएगी, बेचारी अब बहुत बेबस है, आप सब देख रहे हैं, वह अब दर्द महसूस कर रही है)"। बिल अब सीधे सानिया से ही कहा-"बेबी, गेट द फ़ील ओफ़ डबल पेनेट्रेशन इन पस्सी, आफ़टर दिस, यू विल नौट हैव एनी प्रौब्ल्म इन एडल्ट इन्डस्ट्री, दिस इज अलटीमेट, यू विल बी अ ग्रैजुएट इन द आर्ट ओफ़ फ़किन्ग (लौन्डिया, एक बार अपने चूत में दो लन्डों का मजा ले लो, इसके बाद तुम्हें कभी कहीं किसी से चुदाने में परेशानी नहीं होगी (ब्लू फ़िल्म की दुनिया में भी), यह काम ही लड़की के लिए अंतिम है, इसके बाद तुम्हें चुदाई में विशेष महारत हो जाएगा)। सानिया तो जैसे चुदाई के नशे में अब थी, उसे कुछ पता न था, वो मदहोशी में बोली कि ठीक है, और फ़िर क्या था। बिल फ़टाक से नीचे लेट गया और सानिया को अपने उपर खींच लिया। वो हरामजादी भी उसके उपर चढ़ गई और अपने चूत में खुद अपने हाथ से बिल का लन्ड घुसा ली और बिल के उपर लेट कर उसके होठ चुसने लगी। इसके बाद बिल ने एडविन को पुकारा तो वो मादर्चोद भी अब सानिया की पीठ पर चढ़ गया अये साले ने अपना लन्ड सानिया की लाल भभूका चूत में घुसाने लगा थोड़ी मशक्कत के बाद साले ने अपना आधा लन्ड सानिया की बूर में घुसा हीं दिया। साली का बूर इन दोनों हरामियों के लन्ड से खींच कर लाल हो रहा था। लग रहा था कि उसकी बूर अब अपने किनारों पर से फ़ट जाएगी। पर वाह उपरवाले की कलाकारी....सानिया की बूर लाल भभूका हो गई पर जरा भी नहीं फ़टी और फ़िर हौले-हौले उसके बूर की चुदाई दो-दो लन्डों से होने लगी। वो अब दर्द से बिलबिला रही थी, गों-गों उउउम्म्म्म्म्माआआआह्ह्ह्ह्ह्ह कर रही थी पर साथ-साथ इस नये अंदाज में चुद भी रही थी। जमील को उसके दर्द को देख आँख बन्द कर लिया, रागिनी की आँखों में आँसू आ गए, पर वो सब साले विदेशी उस फ़ूल सी दिखने वाली हसीन, कोमल सानिया की मस्त चुदाई कर रहे थे और एलिशा इस सब का विडियो बना रही थी।तभी एडविन को थोड़ा साईड कर के जैक भी आ गया और रोती गिड़गिड़ाती सानिया की गाँड़ में अपना काला लन्ड पेल दिया, फ़िर तो तीनों ने मिल कर उस बेचारी सानिया की गत बना दी। बेचारी रो रही थी, और चुद रही थी, दो-दो लन्ड उसकी बूर को भोंसड़ा बना रहा थ और एक काला भुजंग लन्ड उसकी गाँड़ की मालिश कर रहा था। करीब पाँच मिनट तक सानिया को इसी तरह से रगड़ने के बाद वो साले हरामी हटे और हमें आगे बढ़ने को कहा। साली की बूर और गाँड़ दोनों हीं अब पूरी तरह से खुल गये थे और वो एक साँप के बिल का आभास दे रहे थे। जमील थोड़ा हिचका, अपनी बेटी की दशा देख, पर मैं क्यों रुकता...सानिया तो खुद अपनी मर्जी से यह सब चुनी थी तो आज साली को पुरा बता देना था कि मर्दों की जात कैसे किसी मस्त माल के बदन को भोगती है, सो मैं उसकी गाँड़ में अपना लन्ड बिना किसी भुमिका के एक जोर के धक्के के साथ पेल दिया। सानिया दर्द से कराह उठी पर फ़िर चुप होगई जब देखी कि अभी उसका प्यारा चाचू उसकी गाँड़ मार रहा है तो। मैं मस्त हो कर खुब जोर-जोर से साली की चुचियों को मसलते हुए गाँड़ मार रहा था। जल्द हीं मैं झड़ने के करीब हो गया (देर से उस हरामजादी की ऐसी चुदाई देख मेरा पहले से हीं बुरा हाल था), तो मैंने पुछा कहाँ निकालूँ माल, और जब तक सानिया बोले, सके पहले जैक बोला-"इन द पस्सी, हर डैड इज हीयर, लेट हर गेट प्रेग्नेन्ट बाई हर टुडेज फ़क (उसकी बूर में, उसका बाप साथ हैम उसे आज की चुदाई से गर्भवती होने दो)"यह सुन मेरा लौड़ा झटका खाने लगा और मैं जल्दी से उसे सानिया की बूर में घुसाया और लन्ड से पिचकारी छुटने लगी। साली का बूर भर गया। जब मैं बाहर निकाला तो जैक तुरन्त बहर बह रहे मेरे सफ़ेद माल को अपने लन्ड से समेटा औए फ़िर उसे उसी काले लन्ड से भीटर ठेल दिया, जोर से...जैसे सब माल को वो भीतर सानिया की गर्भाशय में घुसा रहा हो। सब सफ़ेदा को काछ कर भीतर ठेलने के बाद जैक हटा और जमील को आने को कहा। जमील भी सानिया की गाँड़ मारने लगा। सानिया एक बार सर घुमा कर अपने बाप को देखी और मुस्कुराते हुए बोली-"अब्बू...आह मजा आ गया", और जैसा कि मैंने किया था वैसे हीं जमील भी जब झड़ने को हुआ तो सानिया की बूर में अपना लन्ड पेल दिया। जब जमील अपने लन्ड का माल अपनी बेटी की बूर में उड़ेल कर हटा तो जैक फ़िर आगे आया। एक बार फ़िर वो जमील के सफ़ेदा का वो हिस्सा जो सानिया की बूर से बाहर निकल रहा था, को अपने लन्ड से समेट कर पुनः उसके गर्भाशय तक पहुँचाया। फ़िर इसके बाद एडविन और बिल ने अपना माल सानिया की बूर में निकाला और अंत में जैक के अपने काले हब्सी लन्ड से सानिया को खुब तेजी से जल्दी-जल्दी चोदा और उसको अपने बाहों में जकड़ कर उसकी बूर की जड़ में अपना माल उड़ेला। सानिया की बूर, गाँड़, जाँघ के हिस्से पर हम पाँच मर्दों का सफ़ेद-सफ़ेद माल लिसड़ा हुआ था। जैक एक जोर का चुम्मा उसके होठ पर लिया और थैंक्यु बेबी कहते हुए हटा।हँसते हुए जैक ने अब सानिया से पूछा-"अगर आज की चुदाई से तुम प्रेगनेन्ट हो गई तो क्या तुम अपने बच्चे को बता सकोगी कि उसका बाप कौन है?" उसकी इस बात पर सब हँसने लगे और सानिया का चेहरा अब असल शर्म से लाल हुआ। ऐसी शर्म की लाली मैंने भी सानिया के चेहरे पर पहले नहीं देखी थी। जमील बोला-"अब तो अल्लाह हीं इस मुसीबत से बचाए तो बचाए।" उसका इरादा था कि सानिया गर्भवती न हो, पर मैंने मजे के लिए जड़ दिया-"हाँ जमील, अब तो सिर्फ़ अल्लाह ही सानिया के बच्चे के बाप का नाम बता पाएँगे या फ़िर डी.एन.ए. टेस्ट पर इसके लिए ये तीनों कहाँ मिलेंगे आज के बाद।" हम सब अब कपड़े पहनने लगे। सानिया उठ कर नहाने चली गई। उसे चलने में भी तकलीफ़ हो रही थी। करीब एक घन्टे हम और वहाँ रहे, चाय नास्ता किया और फ़िर वो विदेशी अब अपनी पैकिंग करने लगे। एलिशा ने हमें उस विडियो की एक कौपी बना कर दी। फ़िर एक दुसरे को बधाई दे और अपने ई-मेल एक-दुसरे को बाँट हम वपस अपने कौटेज में आ गए और हम भी पैकिंग करने लगे। सानिया का बूरा हाल था। बेचारी चुप-चाप लेट गई थी और आराम कर रही थी। उसके सामान की पैकिंग भी हमीं ने की। शाम करीब चार बजे हम वापस हो लिए।इसी तरह हम अगले कुछ समय तक मस्ती करते रहे। सानिया भी अब जब-तब चुदाती रहती थी। अब जब बाप का डर भी नहीं बचा तो उस जैसी हसीना को लन्ड की कोई कमी तो होनी नहीं थी, सो अब वो जब मर्जी चुदा कर अपनी चूत की खुजली मिटा लेती थी। पर हम सब जान रहे थे कि असल समस्या तो तब होगी जब सानिया की अम्मी यानि प्रो० जमील की बीवी या बोलिए मेरी भाभी-जान वापस आ जाएँगी। हम सब अक्सर इस बात कि चर्चा करते थे। सानिया को कम हीं फ़िक्र थी। उसे पता था कि उसकी चूत का आकर्षण हम दोनों अधेड़ उम्र मर्दों को कोई ना कोई रास्ता निकालने के लिए मजबूर कर हीं देगा। वो अक्सर कहती, "मेरा क्या है, मैं तो किसी के भी साथ होटल में जा कर चुदा लुँगी, अब आप दोनों चिन्ता करो कि कैसे मुझे चोदोगे?" बेचारा जमील जब भी यह सुनता सकपका जाता, वो सानिया को समझाने लगता कि होटल में तो रंडियाँ चुदाती हैं, तुम ऐसा क्यों बोलती हो..." और सानिया की कातिल हँसी उसे चलनी करने लगती। वो ऊठती और जमील की गोद में बैठ कर उसके होठ से अपने होठ सटा कर उसकी बोलती बन्द कर देती। उसकी यह अदा देखने लायक है। एक हसीन कयामत सी लगती थी तब वो, बेचारे जमील को....पर अब तो उसके बस का कुछ था नहीं, सानिया की चूत की मस्ती उसने भी लुटी थी और जम कर लुटी थी तो अब वो अपनी बेटी को किस मुँह से रोक सकता था?वैसे दोनों ही बाप-बेटी मेरे से बहुत आस लगाए हुए थे कि मैं जरुर कुछ ना कुछ करुँगा कि हम सब की मस्ती जारी रहे। खैर एक बात तो तय थी कि अब बिना सानिया की अम्मी को पटाए काम चलने वाला नहीं था। जब इस बात पर हम सब एक मत हो गए तो यह जिम्मेदारी मुझे दी गई कि मैं चाहे जैसे भी हो एक बार जरुर उसको चोद दूँ, जिससे कि वो भी हम सब के रंग में रँगने को तैयार हो जाए। जमील ने तो अब मुझे खुल कर कह दिया कि अगर संभव हो तो मैं थोड़ा जोर-जबरद्स्ती भी कर लूँ उसकी बीवी के साथ। साला अब चूत के लिए इतना बेचैन हो गया था कि अपनी बेटी के बाद अब अपनी बीवी को भी मेरे से चुदाने को तैयार था। मेरे लिए यह पहला मौका होने वाला था कि मैं एक ऐसी औरत को चोदता जिसकी बेटी मैं पहले से चोद रहा था। वैसे बहुत पहले एक माँ-बेटी को चोदा था पर तब पहले माँ चुदी थी फ़िर बाद में बेटी को पटाया था। यहाँ मामला उल्टा था, बेटी पहले चुदी और माँ को अब बाद में चोदना था। सानिया की अम्मी, सकीना एक पारम्परिक घरेलू महिला थी।खैर वो दिन आ ही गया जब सानिया की अम्मी घर लौट आई। जमील साले का तो मूड हीं औफ़ रहता था आजकल। सानिया भी शरीफ़ बन गई थी। करीब एक सप्ताह बीत गया तो दोनों बाप-बेटी को खुजली होने लगी और दोनों लगातार मुझे उकसाने लगे कि अब मैं कुछ करूँ। इधर सानिया की अम्मी भी यह नोट कर ली थी कि जमील कुछ परेशान सा रह रहा है। एक शाम जब हम सब ऐसे हीं बैठ कर गप्पे मार रहे थे तब सकीना (सानिया की अम्मी) ने हीं बात छेड़ दी। उसने मुझसे पूछा, "क्यों भाई-साहब आजकल इनका मूड क्यों उखड़ा-उखड़ा रहता है, कुछ खास बात-चीत भी नहीं करते, थोड़ा अलग थलग से रहते हैं?" मैंने भी कह दिया-"आजकल प्रोफ़ेसर साहब किसी नई लौंडिया के चक्कर में होंगे...आप क्यों फ़िक्र करती हैं, भाभी?" सकीना हँस दी और मेरे जवाब को एक मजाक समझी, जब कि मैंने हकीकत हीं बयान की थी। वो बोली-"क्या भाईसाहब, आज तक तो ढ़ग से मेरे साथ चक्कर नहीं चला सके, तो इस उमर में इनको अब कौन मिलेगी"। इस बार जमील भी बोल पड़ा-"क्यों, तुम बुढ्ढ़ी हो गई होगी, मेरे लिए तो आज भी लड़कियों की लाईन है। कौलेज में हीं कितनी मेरे पे फ़िदा है तुम क्या जानो।" अब सकीना भी बोली-"अच्छा जी तो यह बात है, आपको मैं बुढ़ी लगती हूँ। आज भी इशारा कर दूँ तो दरवाजे पे लाईन लग जाएगी आशिकों की, समझ लो आप। क्यों भाईसाहब..." उसने मुझसे गवाही चाही थी। मैंने भी कह दिया-"जरुर भाभी जी, अगर आप हाँ कर दें तो अभी तुरंत इस प्रोफ़ेसर के सामने हीं आपके उपर चढ़ जाऊँगा। घर में ही जब ऐसा मस्त माल भरा है तो यह साला बाहर मुँह मारने की बात कर रहा है।" मैंने आज से हीं बल्कि अभी से हीं सानिया की अम्मी को बातों से गर्म करने का प्लान बना लिया था, और संयोग से बात की दिशा भी सही जा रही थी। मैंने आगे कहा -"यार जमील एक बार जरा भाभीजान को उल्टा झुका कर पीछे से डाल कर देख साले कौलेज की नन्ही फ़ुद्दियों को भूल जाएगा।" सकीना के गाल लाल हो गये थे। जमील हल्के से मुस्कुराया, और बोला-"तू तो ऐसे कह रहा है कि जैसे सकीना का मियाँ तू हीं है जो तुम्हें सब पता है।" मैंने कहा -"अरे नहीं बे उल्लू...अभी इधर साल-दो साल से ही तो मैं नई-नई जवान हुई लदअकी को चोदना शुरु किया है, वर्ना तुम लोग तो जानते हीं हो कि पहले मैं ३० साल से उपर की खेली-खाई औरतों का दिवाना था, और मुझे पुरी तरह से पकी हुई औरत की फ़ीगर और मस्ती का खुब अनुभव है। भाभी की फ़ीगर देख...आज भी ३६-३२-३८ है। ३८-४० साल की औरत के लिए यह आदर्श फ़ीगर है। बहुत किस्मत वालो हो जमील मियाँ जो ऐसी ठस्स माल जैसी बीवी मिली हुई है।" सकीना अपनी ऐसी बड़ाई सुन कर खुश हो गई, बोली-"वही तो भाईजान...घर की मुर्गी दाल बराबर...ये तो आजकल मेरी तरफ़ पुरी नजर देखते भी नहीं हैं।" ऐसी हीं मस्ती भरी चुहल बाजी इसके बाद अक्सर होने लगी। जमील को पता था कि यह सब मैं क्यों कर रहा हूँ। वो भी अपने बातों से मेरी ऐसी चुहल-बाजी को हर बार थोड़ा और गन्दा दिशा में ले जाता था। पर सकीना थी कि हमेशा अंत में एक कछुए की तरह अपने खोल में लौट जाती, और मैं था कि उसको हलाल करने की जल्दी में था। तभी एक-दो बार मैंने रागिनी से जमील को फ़ोन कराया, सकीना के सामने उन्हें बात करने दिया। साकीना को तब लगने लगा कि यह मजाक नहीं है। जमील अब सच में नई-नई लड़कियों में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है। एक बार अकेले में वो मुझसे पूछी भी तो मैंने कह दिया कि हाँ जब वो नहीं थी तब जमील ने खुब मस्ती की थी। बेचारी दुखी हो गई तो मैंने भी दिलासा दिया-"अब भाभी आप जमील को अपनी दुइया में रहने दो..और खुद भी अलग मौज करो। कौन जाने जब जमील देखेगा कि आप भी बाहर मस्त हो तो उसको घर का खाना याद आए।"सकीना के गाल लाल हो गये थे। जमील हल्के से मुस्कुराया, और बोला-"तू तो ऐसे कह रहा है कि जैसे सकीना का मियाँ तू हीं है जो तुम्हें सब पता है।" मैंने कहा -"अरे नहीं बे उल्लू...अभी इधर साल-दो साल से ही तो मैं नई-नई जवान हुई लदअकी को चोदना शुरु किया है, वर्ना तुम लोग तो जानते हीं हो कि पहले मैं ३० साल से उपर की खेली-खाई औरतों का दिवाना था, और मुझे पुरी तरह से पकी हुई औरत की फ़ीगर और मस्ती का खुब अनुभव है। भाभी की फ़ीगर देख...आज भी ३६-३२-३८ है। ३८-४० साल की औरत के लिए यह आदर्श फ़ीगर है। बहुत किस्मत वालो हो जमील मियाँ जो ऐसी ठस्स माल जैसी बीवी मिली हुई है।" सकीना अपनी ऐसी बड़ाई सुन कर खुश हो गई, बोली-"वही तो भाईजान...घर की मुर्गी दाल बराबर...ये तो आजकल मेरी तरफ़ पुरी नजर देखते भी नहीं हैं।" ऐसी हीं मस्ती भरी चुहल बाजी इसके बाद अक्सर होने लगी। जमील को पता था कि यह सब मैं क्यों कर रहा हूँ। वो भी अपने बातों से मेरी ऐसी चुहल-बाजी को हर बार थोड़ा और गन्दा दिशा में ले जाता था। पर सकीना थी कि हमेशा अंत में एक कछुए की तरह अपने खोल में लौट जाती, और मैं था कि उसको हलाल करने की जल्दी में था। तभी एक-दो बार मैंने रागिनी से जमील को फ़ोन कराया, सकीना के सामने उन्हें बात करने दिया। साकीना को तब लगने लगा कि यह मजाक नहीं है। जमील अब सच में नई-नई लड़कियों में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है। एक बार अकेले में वो मुझसे पूछी भी तो मैंने कह दिया कि हाँ जब वो नहीं थी तब जमील ने खुब मस्ती की थी। बेचारी दुखी हो गई तो मैंने भी दिलासा दिया-"अब भाभी आप जमील को अपनी दुइया में रहने दो..और खुद भी अलग मौज करो। कौन जाने जब जमील देखेगा कि आप भी बाहर मस्त हो तो उसको घर का खाना याद आए।"बेचारी अब असल मुद्दे पर आई, "पर बाहर में मैं यह सब कैसे कर पाऊँगी? मुझे शर्म नहीं आएगी क्या?" मैं तो जैसे इन्ही शब्दों के इंतजार में था। तपाक से बोला-"अरे भाभी अब जब हालत ऐसे हीं हैं तो शर्म-वर्म को छोड़ो, और मजे करो, जलाओ साले जमील को। आप कहोगी तो मैं आपकी शर्म दूर कर दुँगा। वैसे भी मैंने तो जमील के सामने भी कई बार कहा है कि आप इशारा करो तो साले के सामने आपको घोड़ी बना कर चढ़ जाऊँ, पर आब तो कुछ खुल कर बोलती नहीं हो।" वो कुछ सोची...और फ़िर बोली, "अगले इतवार को दोपहर में मैं आपके घर आऊँगी भाईजान फ़िर ठीक से बात होगी। प्रोफ़ेसर साहब दो दिन के लिए सेमीनार के लिए अलीगढ़ जा रहे हैं।" इसके बाद तो मेरे दिल की हालात जो थी वो बयां नहीं हो सकती। सकीना के जाने के बाद मैंने तुरंत सानिया को फ़ोन किया और वो साली शनिवार को मेरे से चुदाने का प्लान बना ली कि वो उसी बिस्तर पर पहले चुदेगी जिस पर मैं उसकी अम्मी को चोदने का प्लान बना रहा था। मैं क्या कर सकता था, खुश हो गया। उस शनिवार को सानिया खुब मस्त हो कर चुदी। दो बार उसकी चूत में मैंने अपना माल निकाला। मेरा सारा माल उसकी चूत से बाहर निकल कर मेरे बिस्तर पर फ़ैल गया। साली यह देख कर खुब खुश थी, बोली आप चादर मत बदलना और मेरी अम्मी को भी इसी चादर पर चोदना। मेरे दिल में तो था कि अब वो दिन कब आएगा जब मेरा माल माँ की चूत में जब निकलेगा तो बेटी उसको चाट कर खाएगी, और जब बेटी की चूत में निकलेगा तो अम्मी अपनी बेटी की चूत में से चाट-चाट कर खाएगी। वैसे अब वो दिन दूर नहीं था।

सानिया की चुदाई भाग-6

सुबह सबसे पहले रागिनी की आँख खुली। उसने जब खिड़की का पर्दा हटाया तो रोशनी से हम सब जग गए। सब ऐसे हीं नंग-धड़ग सो गए थे। रंजिता उठी तो अपने हाथ से अपने बूर को कवर करते हुए उठी और बोली, बाप रे बहुत देर हो गया, अब घर जा कर जल्दी-जल्दी सब काम करना होगा। उसको अभी अपने छोटे भाई बहन को खाना बना कर ९ बजे तक स्कूल भेजना था। पता चला कि उसकी माँ नहीं है और बाप शराबी है। उसका बाप एक बोतल विदेशी शराब के बदले उसे रात भर के लिए मैनेजर के साथ भेजा था। ऐसा आज तीसरी बार हुआ था। रंजिता ने बताया कि उसको अब २००० रू० मिलेगा मैनेजर से, तो मुझे दया आ गई और मैंने उसे २००० और दिए, और अपने शेविंग किट से बोरोलिन दिया की वो उसे अपने गांद के छेद पर लगाया करे। मैंने देखा कि कल कि गाँड़ मराई के चक्कर में उसकी गाँड़ के छेद के फ़ोल्ड्स थोड़ा छिल गए थे। मैंने उसके गांड़ के छेद पर पहली बार अपने हाथ से बोरोलिन लगाया। साली इतना प्यार पा कर पिघल गयी, पर हम सब ने उसे विदा कर दिया। तभी जमील के फ़ोन पर सानिया का फ़ोन आया।जमील तुरंत उससे बोला-"कैसी हो बेटा तुम?" मैंने उसके हाथ से फ़ोन ले कर स्पीकर औन कर दिया। सानिया बोल रही थी-"खुब बढ़िया अब्बू, कोई परेशानी की बात नहीं है। खुब मजा आया। अभी तो सो कर उठी हूँ, और बिल मेरी मालिश कर रहा है।" मैंने पूछा-"ये बिल कौन है बेटा? उन्हीं में से कोई या कोई बाहर का है?" मेरी आवाज सुन सानिया बोली-"ओह, गुड मौर्निंग अंकल। बिल और जैक नाम है एडविन के दोनों दोस्त का। कल रात में तीनों ने मुझे साथ में चोदा। साथ में बिल और एडविन की गर्ल-फ़्रेन्ड्स भी थी, मिल्ली और एलिशा। खुब मजा आया। क्या बताऊँ अंकल, सब ने मिल कर मुझे जो मजा दिया...अल्लाह कसम, ऐसा मजा आज तक नहीं आया था।" मिल्ली और एलिशा ने तो मुझे मिल कर इतना गरम कर दिया कि कब और कैसे मैं चुदी कुछ होश हीं नहीं रहा। बाद में वो दोनों आपस में मशगुल हो गई और तब तीनों लड़कों ने मुझे चोद-चोद कर बेदम कर दिया। बारी-बारी से, तीनों मेरे में घुसा रहे थे और मुझे जरा भी आराम करने का मौका नहीं दे रहे थे। एडविन दो बार मेरे मुँह में और एक बार मेरे बूर में झड़ा। जैक भी मेरे बूर में दो बार झड़ा। बिल अभी तक सिर्फ़ मेरे मुँह में हीं झड़ा, कल रात वो मिल्ली और एलिशा के साथ ही रहा। आज वो मुझे अकेले चोदेगा अभी फ़िर सब मिल कर चोदेंगे।" मैंने तब पूछा, "किसी ने गाँड़ नहीं मारी तुम्हारी?" सानिया बोली, "नहीं वो सब आज के लिए छोड़ा हुआ है इन लोगों ने। चाचू मैंने इन्हें बता दिया कि मैं यहाँ अपने अब्बू और चाचू और एक अपनी कजन के साथ आई हूँ तो ये सब खुब आश्चर्य कर रहे थे। उन्हें विश्वास हीं नहीं हो रहा था कि अपने देश में ऐसा होता होगा। ये साले गोरे समझते हैं कि यही लोग सेक्स एक्स्पर्ट हैं।" जमील बीच में बोला-"तुम्हें ये सब ऐसे नहीं बताना चाहिए था बेटा, कितनी खराब बात है यह"। उसके चेहरे पर हल्की सी चिन्ता उभर रही थी। सानिया अपनी हीं रौ में थी, बात काट कर बोली-"क्या नहीं बताना चाहिए, ये क्या यहाँ हमारे अड़ोस-पड़ोस में, या अम्मी से कहेंगे क्या कि मैं अप्ने अब्बू से चुदाती हूँ। इनको मजा आया, और मुझे भी यह सब बता कर। और हाँ अब्बू, बिल बोल रहा है कि अगर आप सब भी यहीं आ जाएँ तो मजा आ जाएगा। लीजिए बात कीजिए उससे।" और तब एक अंग्रेज मर्दाना स्वर फ़ोन से आया-"हल्लो अंकल्स, गुड मौर्निंग...युर डौटर इज सुपर्ब, शी इज अ डार्लिंग बेबी...शी नोज हौ तो एंजोय सेक्स एंड लेट अ मैन एंजोय हर बोडी...थैंक्यू अंकल फ़ोर हैविंग सच अ नाईस गर्ल विद यु...व्हाई डोंट यु कम एंड जोईन अस दिस मौर्निंग...वी विल हैव अ ग्रेट टाईम टुगेदर...वी औल विल गिव यु अ ग्रेट शो विद युअर डाटर...कम हीयर प्लीज...यु मे एन्जाय आवर गर्ल्स, दे आर ग्रेट कौक सकर्स, युल्ल लव देम।" जमील नो..नो कर रहा था, पर मैंने कहा, "ओके वे विल कम, आफ़टर अबाऊट ३० मिनिट्स, डोंट वरी...." और उसने कहा, वी विल वेट टिल्ल यु कम"। इसके बाद बिल ने हमें थैंक्स कहा, फ़िर सानिया की आवाज आई, "चाचू, आप अब्बू के साथ लाना, बहुत मजा आएगा, सब मिल कर खेलेंगे। रागिनी तुम भी आना और रेडी रहना, ये लोग तुम्हें छोड़ेगे नहीम, तुम मेरी कजन हो, तो सब तुमसे भी मस्ती जरुर करेंगे।" रागिनी ने कहा-"हाँ दीदी, मुझे पता है, मेरे लिए तो ये विदेशी मजा पहली बार ही है, सिर्फ़ तुम्हारी पहल पर मिलेगा ये सब, थैंक्स दी।" बेचारा जमील अब अलग-थलग पर गया, उसे समझ में आ गया कि हम दोनों अब उसके न कहने से रुकेंगे नहीं। रागिनी ने उसको कहा कि अब वो भी तैयार हो जाए, साथ चलने के लिए, नहीं तो बाद में अफ़सोस होगा। वो भी अब चलने को तैयार होने के लिए बाथरूम में चला गया। करीब आधे घंटे बाद हम तीनों नहा-धो कर बगल वाली कौटेज की तरफ़ बढ़ चले। मैनेजर ने हमें उस तरफ़ जाते देखा तो मुस्कुराया। मैंने भी उसको देख आँख मारी, तो उसने अपना दाहिना अँगुठा उपर करके हमें "गुड-लक" विश किया। वो समझ रहा था कि अब हमारा इरादा क्या है।जब हम उनके कौटेज में पहुँचे तब उनका दरवाजा भिड़ा हुआ था और हमारे नौक करने पर किसी ने "कम-इन प्लीज" कहा। हम अंदर गए तो देखा कि तीनों लड़के बिल्कुल नंगे हो बेड और कुर्सी पे बैठे हैं और तीनो लड़कियाँ उनके लंडों से खेल रहीं हैं। एडविन और जैक दोनों बेड पर थे, जबकि बिल कुर्सी पर। लड़कियों में सिर्फ़ सानिया हीं नंगी थी, बाकि दोनों जीन्स और टौप पहने थीं। पास में रखे सोफ़े की तरफ़ हम तीनों बढ़े, तो तीनों लड़के हमारे पास आए, साथ में सब लड़कियाँ भी आई। बिल ने हमें वेलकम किया और सब का परिचय दिया। फ़िर सानिया ने हमारा परिचय कराया उनसे कराया। सब एक-दुसरे से हाथ-वाथ मिलाए। मेरी नजर उन दोनों गोरी बालाओं पर थी। दोनों मस्त फ़ीगर की मालकिन थी। मिल्ली बिल की गर्ल-फ़्रेन्ड थी और एलिशा एड्विन की। दोनों २२-२४ साल की हँसमुख लड़कियाँ थी और देख कर लगता था कि बहनें हैं, खुब गोरी और फ़्रेश माल। मैंने उन दोनों को घुरते हुए कहा-"वेल, यु पीपल कैरी-औन...बिल यु टोल्ड अस थत वील्ल हेव ग्रेट टाईम, सो वील्ल सिट देयर एंड एन्जाय", और हम सब सोफ़े पे बैठने लगे। तभी एडवीन ने रागिनी का हाथ पकड़ा, "कम औन बेबी, यु कम विद अस...वील्ल शो यु द हेवन..." और उसने अपने बाहों का घेरा रागिनी की कमर के चारों ओर लपेट कर उसे अपने साथ बेड पर खींचा। हम जैसे हीं सोफ़े पर बैठे, दोनों गोरी बालाओं हमारे पास आ जमीन पर बैठ गईं, घुटनों के बल।अब हालात यह थी कि सानिया तो बिल का लन्ड चूस रही थी, एलिशा मेरा और मिल्ली जमील का पैंट से बाहर खींच चुकी थीं। रागिनी के बदन से कपड़ा उतारा जा रहा था और वो एड्विन और जैक के बीच में थी जबकि दोनों उसके आगे और पीछे से चिपके हुए थे और कपड़े खोल रहे थे। करीब ५ मिनट बाद बिल ने सानिया को अपने उपर आने का ईशारा किया और थोड़ा कुर्सी पर पसर गया। सानिया ने एक नजर हमें देखा, हम दोनों तो उसी भी देख हीं रहे थे, सो हमारी नजरें मिली। सानिया मुस्कुराई और बिल के उपर चढ़ गई। एक हल्के से कराह के साथ उसने अपने हाथ से बिल का लंड पकड़ कर अपनी चूत में घुसा लिया और फ़िर हौले से उसकी गोद में बैठ गई। उस कमरे में सबसे लम्बा लन्ड बिल का ही था, करीब १०" का होगा, या ९" तो पक्का था। फ़िर जब बिल थोड़ा और पसरा तो सानिया उपर से अपने कमर को उठा गिरा कर अपने चूत को उसके लन्ड से चुदाने लगी। बिल उसकी चूचियों से खेल रहा था, और फ़िर जल्द हीं सानिया की सिस्की कमरे में भर गई। अब हमारे साथ वाली गोरी लड़कियाँ भी खड़ी हो कर अपने कपड़े खोलने लगी थीं। रागिनी को बिस्तर पर लिटा कर दोनों दोस्त उसकी छाती और बूर को चूस चाट रहे थे। जमील के लिए तो हालत था कि वह किधर देखे और किधर नहीं देखे। मैं तो अभी एलिशा के पैन्टी पर नजर गड़ाए था जो अब हौले-हौले उसके कमर से नीचे खिसक रही थी और उसका एक दम चिकना मक्खन चूत की चमक आने लगी थी। जल्द हीं एलिशा मेरे गोद में और मेरे बगल में बैठे जमील की गोद में मिल्ली चढ़ गई और हमरी तरह अपना चेहरा कर अपने बूर में हमारे लन्ड घुसा ली। वो दोनों खुद हीं उपर से हिल-हिल कर हमें चोद रहीं थीं। हमें भी मजा आ रहा था। जमील की आँख बन्द थी, जबकि मैं एलिशा को अपनी ओर खींच कर उस्कए होठ का रस पान करने लगा था।जब मैंने कमरे में नजर घुमाई तो देखा कि एडविन का लन्ड रागिनी की मुँह में था, जबकि जैक उसके उपर चढ़ गया था, और अपने लन्ड से उसकी चुदाई शुरु कर चुका था। सानिया अब नीचे कार्पेट पर केहुनी और घुटने के बल थी और बिल अपने १०" के लौंड़े से उसकी जबर्दस्त चुदाई कर रहा था। हर धक्के के साथ सानिया के मुँह से एक आवाज निकलती, जिसे सुन कर पता चल रहा था कि उसे मीठे दर्द के साथ मस्ती भी चढ़ रही है। आवाज कीकियाने जैसी थी। जमील अब मिल्ली को अपने उपर से हटाया और उसे नीचे गिरा कर उपर से उस पर चढ़ गया। मैंने भी अपने उपर से एलिशा को उठाया और फ़िर कार्पेट पर बिल्कुल सानिया के पास लेट गया और एलिशा को इशारा किया कि वो मेरे उपर आ जाए। अब जब एलिशा मुझे उपर से चोद रही थी, मैं बिल्कुल पास लेट आराम से सानिया की बूर की १०" के लन्ड से चुदाई देख रहा था। (हालाकि, विदेशी अंग्रेजी बोल रहे थे, मैं उनकी बात भी हिन्दी में लिखुँगा) बिल ने मुझे देखा कि मैं सानिया की चुद रही चूत से नजर टिकाए हूँ तो बोला-"क्या मैं आपकी बेटी को ठीक से चोद रहा हूँ?" मैंने उसे सुधारा कि सानिया मेरी नहीं जमील की बेटी है। तब वो जमील से पूछा यही बात। बेचारा जमील शर्मा गया, और सानिया कीकियाते हुए भी हँस दी। मैंने कहा, उसकी बेटी से ही पूछ लो। अब मिल्ली बोली-"उसको तो खुब मजा आ रहा होगा, मुझे पता है जब बिल इस पोज में चोदता है तो उसका लन्ड भीतर बच्चेदानी तक पहुँचता है। अजीब सी सुरसुरी होती है बदन में। सही कहा न मैंने सानिया।" सानिया आह आह आह करते हुए बोली-"हाँ सही कह रही हो, बहुत गजब का सेन्शेसन है यह...इइस्स्स ओ माँ...हाँ आआअह्ह आअह्ह्ह्ह"। बिल जोश में आ गया और गजब के धक्के लगाए, अब हर धक्के के साथ सानिया की चुतड़ हवा में लहरा जाती, जमीन छूट जाता एक पल को, और सानिया उन धक्कों पे कराह उठती। बिल ने १५-२० जोर के धक्के लगाए, और फ़िर अपना लन्ड बाहर खींच लिया। सानिया अब तक झड़ चुकी थी, शान्त पड़ी थी नीचे।तब बिल ने उसको पलट दिया और उसे सीधा लिटा कर उसके पैर फ़ैला दिये और खुद उसकी खुली हुई टांगो के बीच बैठ गया। ठीक से पोजीशन ले कर उसने एक जोर के धक्के के साथ अपना पुरा लन्ड सानिया की गुलाबी चिपचिपी बूर में घुसा कर उसकी चुदाई करने लगा। अब साफ़ दिख रहा था कि बिल का सौलिड १०" का मोटा लन्ड किस तरह सानिया की बूर को स्ट्रेच कर रहा था और कैसे बिल्कुल कसा-कसा भीतर घुस रहा था। बिल उसे पूरा लगभग ९" तक बाहर खींचता, उसका लाल सुपाड़ा, झलकने लगता, और फ़िर जोर से हुमच कर उसे पूरा जड़ तक सानिया की बूर में पेल देता, और सानिया कराह देती....आआह्ह्ह। कभी-कभी के धक्के पर सानिया के चेहरे पर शिकन भी दिखती। पर वो खुब मस्त हो कर बिल से चुदा रही थी। मैं एलिशा को सीधा लिटा उसके बूर में अपना लन्ड पेल कर शान्त हो सानिया की मस्त चुदाई देख रहा था। जमील चोर नजर से सानिया को देखता, और मिल्ली को चोदने लगता। साला ऐसे दिखा रहा था कि सानिया से उसको कोई मतलब हीं नहीं है। तभी जोर से चीखी-"ओ माँ..आअस्श्ह्ह्ह्ह" और जोर से उसका बदन काँपा। हम सब उसकी तरफ़ देखे। वो झड़ रही थी, उसकी बूर से चिपचिपा पानी बह निकला...वो शान्त हो गई। बिल अभी भी गर्म था और लन्ड पेल रहा था। हल्के-हल्के वो अब भी कराह रही थी, पर ये आवाज उसके आनद को बयां कर रही थी। मुझे सानिया पर दया आया, और मैंने कहा-"बिल, तुम रागिनी की मुँह में अपना झाड़ लो, वो बहुत अच्छा लन्ड चूसती है। रागिनी की बूर को अभी एडविन चोद रहा था और जैक उसकी चूची चूस रहा था। बिल अब सानिया को छोड़ कर रागिनी के पास आया तो रागिनी ने अपना मुँह खोल दिया, और बिल का लन्ड चूस-चूस कर उसे झाड़ दी। उसी समय जमील ने अपना पानी मिल्ली की बूर में निकाल दिया और उसके बदन पर हाँफ़ते हुए गिर गया।मैं भी अब एलिशा के भीतर खलास होने की नियत से जोर जोर से उसे चोदने लगा था। जब मैं उसकी बूर में झड़ने वाला था तो वो बोली कि मैं उसके मुँह में झड़ू, सो मैंने अपना पानी उसकी मुँह में निकाला जिसे वो बड़ी अदा से खा गई। तभी एडविन को सूझा कि क्यों न सानिया के साथ सब मिल के चोदें, इसका रिहर्सल रागिनी के साथ एक बार कर लिया जाए। बस वो यह कह कर उसके बूर से लन्ड बाहर खींच लिया और उसको उलटा लिटा कर उसकी गाँड़ को चाटने लगा। बाकी दोनों गोरे साले भी उसके बदन से खेल-खेल कर उसे उत्तेजित करने लगे। रागिनी उनके इस अंदाज पर बिना चुदे ही आह-आह करने लगी, कि एडविन ने उसे अपने गोद में खींच कर बिठाया और कहा कि वो उसके लन्ड को अपनी गाँड़ में डाल कर बैठ जाए। थोड़े प्रयास के बाद रागिनी उसके बताए तरीके से उसकी गोद में बैठने में कामयाब हो गयी। वो दोनों बिस्तर की एक किनारे पर थे। एडविन ने उसके चूचियों को पीछे से पकड़ा और उन्हें हल्के से मसलते हुए रागिनी को अपने तरफ़ खींच कर उसकी पीठ को अपने सीने से लगा लिया। अब बिल सामने आया और उसकी चूत को अपनी उँगली से सहलाया और फ़िर अपने १०" लन्ड को बड़े प्यार से रागिनी की चूत पर लगा कर रुका, तभी मैंने देखा कि एलिशा एक हैंडी-कैम कैमेरा ले कर आ गई, न जाने कब वो उठ कर गई और बगल के रूम से ले कर आ गई। जैक अब बिस्तर के उपर चढ़ गया और अपना लन्ड रागिनी की मुँह में डाल दिया। एलिशा कैमरा औन कर दी थी, और जब सब सेट हो गया तो एलिशा बोली-"एक्शन"।बिल ने एक झटके से अपना लन्ड उसकी चूत में पेल दिया। उसके मोते लंड से पहली बार चुदते हुए, रागिनी के मुँह से कराह निकली पर वो कराह सुनाई नहीं दी, जैक का लंड जो उसकी मुँह में था, सिर्फ़ एक गों-गों जैसी आवाज उसके मुँह से निकली। जल्द हीं बिल के धक्के सही हो गये, और हर धक्के के साथ रागिनी का बदन मस्त तरीके से हिलता और उसके गाँड़ और मुँह के लन्ड उसकी गाँड़ और मुँह की चुदाई कर देते, बिना किसी मेहनत के। सिर्फ़ एक बिल का कमर धक्के लगा रहा था और रागिने की तीनों छेद में चुदाई हो रही थी। मस्त नजारा था। जमील भी हक्का-बक्का सा मुँह खोल कर सब देख रहा था। उस बेटीचोद को पता भी नहीं चला कि सानिया मेरे और उसके बीच में आ गई है, और और मैं उसकी नंगे पीठ को सहला रहा हूँ। मैं बोल उठा-"मस्त नजारा है, है न सानिया? ऐसे हीं तुम भी चुदोगी थोड़ी देर में, देख लो। एलिशा ने अब कैमेरा हम लोग की तरफ़ घुमाया, तब जमील को समझ में आया अब उसकी और सानिया की नंगी फ़ोटो कैमरे में खींचने वाली है, तो वो बेचारा घबड़ा कर कभी अपने लन्ड को हाथ से छुपाता तो कभी अपने चेहरे को, पर दोनों में से कु तो छुपने वाला था नहीं। सानिया बरे नजाकत के साथ अपने नंगे बदन की फ़ोटो उतरवाई और फ़िर अपने हाथों कि हिला कर विश भी किया। मैंने तो खुब प्यार से उसके एक चूची को मसला और गालों पर पप्पी लेते हुए पोज दिया उस विडियो में, फ़िर कैमेरा उस तरफ़ चला गया जहाँ रागिनी चोद रही थी तीनों से।वो तीनों मादरचोद उस बेचारी रागिनी की जबर्दस्त चुदाई कर रहे थे। साली के मुँह से आह-आह और इस्स्स्स्स की ही आवाज लगातार आ रही थी। तीनों लगभग साथ साथ अब हिल रहे थे और रागिनी ने अपना बदन उन सब की दया पर ढ़ीला छोड़ दिया था और उस का बदन कब किस तरह से धक्के खा किधर को हिल जाता उसे भी पता नहीं चल रहा होगा।
सानिया अपने बाप की तरफ़ देखी और उसे देखते हुए मुझसे बोली, "चाचू ये सब तो मुझे भी ऐसे हीं चोदेंगे न?" जमील ने यह सुन कर अपना चेहरा सानिया की तरफ़ घुमाया, तो सानिया और उसकी नजरें मिली और सानिया मुस्कुराई और थोड़ा चहकते हुए फ़िर बोली, इस बार अपने बाप से, "अब्बू, मैं भी ऐसे हीं चुदाऊँगी अब, सच में खुब मजा आयेगा। जब देख कर ऐसी मस्ती लग रही है तो जब तीनों अपने लन्ड से मेरी तीनों छेद को भर कर चोदेगे तो कितना मजा आएगा।" तभी तीनों एक के बाद एक अपनी अपनी छेद में जह्ड़ गए और रागिनी की तीनों छेद से सफ़ेद चिपचिपा माल बाहर ओवरफ़्लो हुआ, पर रागिनी ने अपने मुँह का माल सब खा लिया। मिल्ली से उसकी बाकी दोनों छेद चाट कर साफ़ कर दी, और मेरी प्यारी सानिया उन मादरचोदों का लन्ड चुस-चुस कर साफ़ कर दिया। जब वो एडविन का लन्ड मुँह में ली तो जमील ने उसे इशारा किया कि वो उसे मुँह से साफ़ न करे, क्योंकि यह वाला लन्ड गाँड़ के भीतर था। सानिया सब समझ गई और खुब प्यार से उस लन्ड को भी चाटी और मुँह में ले कर चूसा भी। फ़िर बोली, "अब्बू, अब मुझे समझ में आ गया है कि चुदाई के खेल में जितना गन्दा खेलो, उतना मजा है। मैं आज इन सब के लिए रंडी बनी हूँ पैसा ले कर चुदाने आई हूँ। आप बस यहाँ बैठ कर देखिए कि मैं कैसे-कैसे चुदाती हूँ, और मजा लुटिए। आप अफ़सोस मत कीजिए, अगर आपका साथ न भी होता तो मैं इस मजे के लिए जरुर रंडी बनती। आपको कम से कम यह तसल्ली तो होगा कि आपकी बेटी क्या कर रही है, किससे चुदा रही है, कैसे चुदा रही है यह सब पता हो। दुनिया में कम हीं बाप को पता होगा कि उसकी बेटी कब किसके साथ हम बिस्तर हुई। अब के समय में सब की बेटी शादी के पहले खुब जम कर चुदवाती है, अपने जवान बदन का मजा लेती है। आपकी यह हसीन बेटी इतने दिन तक कुँवारी रह गई, यह सब आपके ही अच्छे भाग्य का नतीजा है। पर अब जब आप खुद अपनी बेटी चोद लिए तो जब मैं दुनिया से चुदा कर मजा ले रही हूँ तो प्लीज आप दुख मत कीजिए। मेरा हौसला बढ़ाईए, जैसे चाचू मेरा हौसला बढ़ाते रहते हैं।" जमील बोला-"पर बेटी ऐसे तुम बदनाम हो जाओगी, तुम्हारी शादी कैसे होगी।" सानिया पुरे आत्मविश्वास से बोली-"अरे, आप फ़िक्र मत कीजिए, मैं कोई लड़का पटा लुँगी, मेरे जैसी हसीना पर कोई भी फ़िदा हो जाएगा।" मुझे सब सुन कर मजा आ रहा था। मैंने हौसला बढ़ाया-"और कुछ न हुआ तो मैं शादी कर लुँगा सानिया फ़िर तो तुम आजादी से सब से चुदाना, और ढ़ेर सारे बच्चे पैदा करना। अच्छी तरह से चुदी रहोगी तो बच्चे भी नौर्मल पैदा होंगे, भीतर के अंगों का कसरत तो चुदाई हीं हैं। मैं तो अभी से देख रहा हूँ, कि तुम्हारी बेटी तुमसे भी ज्यादा जानमारूँ माल बनेगी।" सानिया ने मस्ती में आकर मुझे झिड़का-"शट-अप, अब मेरी बेटी पर लाईन मत मारो, अभी वो बेचारी पैदा भी नहीं हुई है", और हँस पड़ी। मैंने भी जड़ दिया, "मैं तो अभी से तुम्हारी बेटी की बूकिंग कर रहा हूँ, तुम्हारी बेटी की जवानी का पहला स्वाद मैं लुँगा। ७० साल की उमर में १७ साल की तेरी हसीन बेटी की बूर की सील तोड़ने का मजा ही असीम होगा।" यह सुन कर हम दोनों जोर से हँस पड़े। यह बातें हिन्दी में हुई, विदेशियों को समझ तो झाँट न आया, पर हमें हँसते देख वो भी हँस पड़े। एलिशा अभी भी हमारा नंगा फ़ोटो उतारे जा रही थी।इन्हीं सब बातों में करीब आधा घन्टा बीत गया और इस बीच में तीनों के लन्ड रागिनी और मिल्ली ने चुस-चुस कर थोड़े ठीक ठाक कर दिए थे, तो एडविन ने सानिया को पास आने को कहा, और सानिया हमारे पास से उठ कर बिस्तर की तरफ़ चल दी। उस साली सानिया की चाल में गजब का आतमविश्वास था। हरामजादी जाते-जाते अपने अब्बू को आँख मारी और अपने बूर पे हाथ फ़ेर कर जमील की तरफ़ एक फ़्लाईंग-किस उछाला। आज तक मैंने लोगों को अपने होठों को सहला कर फ़्लाईंग-किस देते देखा था, आज पहली बार देखा, तो जाना कि लड़कियाँ अपने नीचले होठ से भी फ़्लाईंग-किस दे सकती हैं। उस रांड की इस अदा पर वो सब विदेशी मादर्चोदों और उसकी छिनाल लड़कियों ने खुशी से तालियाँ बजाई, तो सानिया ने एक बैले डासर के तरह से हल्के घुटनों पर झुक कर उनका आभार जताया। सच, साली आज तो गजब फ़ौर्म में थी।इसके बाद जैसे हीं वो बेड के करीब पहुँची, जैक ने आगे बढ़ कर उसे गोदी में उठा लिया और उसे लेकर हीं बेड के उपर चढ़ गया। एलिशा सब शूट कर रही थी, अपने कैमरे में। इसके बाद तो तीनों हीं उस साली रंडी के बदन के पिल गए। आब सब ने सावन के महिने में सड़कों पर कुत्तों के झुंड को किसी एक कुतिया के पीछे जीभ लपलपाते हुए घुमते देखा होगा। उस बएड को देख कर मुझे वही सीन याद आया। यहाँ भी एक कुतिया पर जवानी की गर्मी चढ़ी हुई थी, और उसके चक्कर में ये तीनों साले मादरचोद कुत्ते बने हुए थे। तीनों के तीनों यहाँ अपना-अपना उल्लू साधने में लगे थे। पर तभी मुझे ख्याल आया कि सड़क की कुतिया तो झुंड में से किसी एक को चोदने देती है, पर यह साली तो आज तीनों को चोदने देगी, बल्की अगर मैं और उसका बाप हीं आज उस पर चढ़ जाँए तो वो हरामजादी न नहीं करेगी। मुझे आज सानिया गर्मी चढ़ी कुतिया (a bitch on heat)से ज्यादा हीं दिखी। यही सब सोचते हुए मैंने जब देखा की साली बिल की गाँड़ अपने जीभ से चाट रही है तो मैंने जमील से कहा, "यार, हमने तो साली से अपनी गाँड़ चटवाई भी नहीं, देख रहे हो कैसा मस्त चाट रही है। बहुत मजा आएगा अगर इस साली से हम भी कभी चटाएँ।" जमील भी सब देख रहा था और अब समझ गया था कि उसकी प्यारी बेटी सानिया अब रंडी बन चुकी अपनी खुशी से, और अब वो पीछे नहीं हटने वाली, सो अब वो भी बोला-"हाँ यार सो तो है, मुझे तो जरा भी अंदाजा नहीं था कि मेरी बेटी इस कदर सेक्सी है कि ऐसा सब कुछ महिने-दो महिने में करने को तैयार हो जाएगी। जरा भी शर्मो-हया नाम की चीज हीं बाकि नहीं उसमें। मुझे तो अब यह चिंता सता रही है कि जब इसकी अम्मी लौटेगी तो क्या होगा?"

सानिया की चुदाई भाग-5

जमील अब बड़े चिन्तित स्वर में सानिया को कुछ कहना चाहा, पर सानिया ने तुरंत उसकी बात काटी और कहा-"अब्बू, अब कुछ नहीं, मुझे मौका मिला है तो मैं इस ट्रीप में खुब मजे करुँगी।" मैंने जमील को सांत्वना दी, "यार अब जाने दो उसको, जवान है, तो जवानी के खेल का लुत्फ़ लेगी हीं। अगर कोई लड़की खुद तय कर ले कि वो अब चुदवाएगी, तो उसको कैसे रोक सकता है कोई, वह कहीं न कहीं अपना मुँह काला करेगी हीं। तेरी बेटी तो बिना तुमसे कुछ छुपाए सब करती है, इतनी ईमानदार तो है ये। और यार, वैसे भी वो साला मैनेजर अभी एक लौन्डिया लाएगा, उसके साथ पहले तुम कर लेना, फ़िर एक बार मैं भी उसको चोद कर अपना जायका थोड़ा बदल लुँगा।" रागिनी व्यंग्य में बोली-"वाह अंकल, नई लौन्डिया के नाम पर दोनों बुड़्ढ़े फ़िसल गए, मेरा क्या होगा सोचा भी नहीं।" मैंने उसके गाल पर प्यार भरी चपत लगाई-"अरे बेटा तू तो मेरी जान है, तुम्हारी तो मैं रात भर चोदुँगा, जमील को हीं उसे रात में संभालना होगा।"सानिया जब तैयार हो कर वापस आई तो वो गजब ढ़ा रही थी। मेरे मुँह से तो सीटी निकल गई। उसने एक काला-लाल लौंग स्कर्ट और छॊटी सी कुर्ती पहनी थी, जो शायद रागिनी की थी, इस लिए उसका पेट खुला हुआ था (सानिया, रागिनी से ज्यादा लम्बी है)। उसके गोरे सपाट पेट पर एक गहरी गुलाबी नाभी अपने को बूर की छॊटी बहन साबित कर रही थी। हल्के से मेकप ने उसकी खुबसुरती बढ़ा दी थी। सानिया ने जब हम सबको अपनी तरफ़ैसे घूरते हुए पाया तो आँख मारी। मैंने कहा-"कयामत ढ़ा रही हो डार्लिंग आज," तो सानिया मुस्कुराई और अपना स्कर्ट उपर उठा दिया। साली ने भीतर एक दम छॊटी सी लाल पैन्टी पहनी थी, जो लग रहा थी कि किसी १४-१५ साल की लड़की की साईज की थी और उसकी बूर में धंसी हुई थी, जिससे उसके बूर के दोनों फ़ाँक थोड़े आधे-अधुरे से अपने मौजुदगी का अहसास करा रहे थे। जल्दी हीं उसने अपना जलवा समेटा और फ़िर हमारी तरफ़ एक फ़्लाईंग किस उछालते हुए बाहर की तरफ़ चल दी। रागिनी ने कहा - "बेस्ट औफ़ लक..."।उसके जाने के एक मिनट के भीतर मैनेजर अपने साथ एक माल ले कर हाजिर हुआ। एक दम सही माल लाया था पट्ठा। १८-१९ की उम्र, पहाड़ी नाक-नक्श, खुब गोरी चिकनी माल थी वो। रंजीता नाम था उसका। हमें हल्के से प्रणाम करके पास खड़ी हो गयी, तो मैनेजर ने कहा कि लगभग नई हीं है सर अभी यह, इसे कुछ देना नहीं है, यह हमारी तरफ़ से है, और कुछ अगर आप चाहें तो बताएँ। मैंने कहा कि सब ठीक है तो वो चला गया। मैंने उसे पास बिठाया और फ़िर पूछा कि क्या वो कुछ लेगी-चाय पानी वगैरह...। उसने ना में सर हिलाया। शायद वो अभी ज्यादा चुदी नहीं थी। मेरी तो लार टपकने लगी थी। मैंने जमील को कहा-"क्यों दोस्त अब तुम जाओगे, या मैं हीं पहले चोद लू फ़िर रात भर तुम रखोगे इसको।" तो वो चुप रहा, शायद उसे सानिया का ख्याल आ रहा था। सही भी था, आखिर सानिया थी तो उसकी सगी बेटी...पर वो भी क्या करता, अब जब उसकी बेटी खुद रंडी बन कर खुश हो रही थी तो।मैंने रंजिता तो अपने साथ चलने का इशारा किया, तो वो मेरे साथ बेडरुम में आ गयी। कमरे में आते हीं मैंने उसको कहा कि वो एक बार मेरे लन्ड को चुसे, इतना चुसे कि मेरा माल निकल जाए। मेरा इरादा था कि जब मुझे रंजिता को एक बार हीं चोदना था तो उसी एक बार में मैं साली का सारा रस पुरा चुस लेना चाहता था। रंजिता के लन्ड निकालने और चुसने की स्टाईल से मुझ जैसे अनुभवी को पता चल गया कि वो अभी इस खेल में अनाड़ी है। मैंने पूछा, "पता है न कि कैसे चुदाया जाता है मर्द को मजा देने के लिए? बोलो।" मेरे जोर देने पर वो बोली, "हाँ, पता है, दो बार पहले भी वो यहाँ आई है।" मैंने उसको बात करने के लिए मजबूर करने के लिए पूछा-"क्या-क्या की थी तुम तब? लन्ड चुसी थी?" वो बोली-"नहीं।" मैं तो पहले हीं समझ गया था। मैंने कहा अब चुसो ठीक से, मैं जैसे बता रहा हूँ, अगर मर्द को मजा दोगी तो तुम्हें भी चुदाने में मजा आएगा और पैसे भी ज्यादा कमाओगी, अगर मर्दों में तुम्हारी डीमान्ड होगी तो। मर्द के सामने नंगी हो टांग खोल कर लेट जाने से तुम्हें कुछ मजा थोड़े ना मिलेगा, उल्टे दर्द ही हुआ होगा ऐसे चुदी होगी तो। बिना मजा के चुदी हो आज तक इसीलिए ऐसे छुई-मुई सी गुमसुम हो यहाँ, वर्ना अगर मजा मिला होता तो खुश होती कि आज एक और नया लन्ड से बूर की खुजली मिटेगी, ऐसा सोच कर।" फ़िर मैंने उसको समझाया कि कैसे मर्द के लौंडे को चुसा जाता है। बच्ची समझदार थी, जल्दी हीं समझ गई और मेरे लन्ड में सुरसुरी पैदा करने लगी। जल्दी हीं मैं छूट गया, उसकी मुँह में हीं। उसने मुँह बिचकाया, पर मेरे समझाने से सब पी गयी। उसके होठ पर मेरे लन्ड का जूस थोड़ा सा चमक रहा था। बड़ी प्यारी से सुरत लग रही थी साली की। अब मैंने उसको खड़ा किया और फ़िर एक-एक कर उसके कपड़े उतार दिए। कुर्ता, फ़िर सल्वार, फ़िर समीज, फ़िर ब्रा और अंत में पैन्टी। साली का नंगा बदन मस्त था। हल्की-हल्की काली-काली झाँटों से घिरी हुई उसकी बूर एकदम ठ्स्स टाईट दिख रही थी। मैंने जब सकी झाँटों पर उँगली चलाई को उसके बदन की थड़थड़ाहट मुझे महसूस हुई। उसकी झाँटों के आकार और लम्बाई ने मुझे बता दिया कि अभी इस लौन्डिया की झाँट अनछुई है, कभी कैंची तक नहीं चली इस पर। मैंने पूछा-"कितने दिन से झाँट साफ़ नहीं की हो जान?" वो बोली-"शुरुआत में हीं दो बार की थी फ़िर नहीं साफ़ की कभी।" मैंने देखा कि अब वो थोड़ा खुलने लगी है तो फ़िर पूछा-"किस उम्र में झाँट निकलनी शुरु हुई तुम्हें ? झाँट पहले आई या माहवारी?" रंजिता ने कहा-"१५ में कुछ महिना कम था जब माहवारी शुरु हुई, झाँट उससे करीब तीन-चार महिने पहले से निकलना शुरु हुई। माहवारी के पहले हीं दो बार साफ़ की थी कैंची से।" मैंने अब तक उसे बिस्तर पे लिटा दिया था और उसकी चुचियों को चुसना, मसलना शुरु कर दिया था। जल्दी हीं रंजिता कसमसाने लगी। मेरे जैसा अनुभवी रसिया के लिए तो वो नौसिखुआ थी। उसे बेचैन करने के बाद, मैं उसकी बूर की तरफ़ ध्यान देना शुरु किया। बूर की चटाई उसके लिए अनोखा अनुभव था। उसकी बूर मुझे एकदम कुँवारी बूर का मजा दे रही थी। उससे निकल रही खुश्बू मेरे लन्ड को टनटना चुकी थी। मैंने उसको जब पूरी तरह से तड़फ़ड़ाते हुए देखा तो उसके उपर चढ़ गया। उसके जाँघ खोले और फ़िर अपना लन्ड हौले-हौले साली के बूर में पेल दिया। उसके जवानी के रस से सराबोर बूर में लन्ड घुसाने के लिए किसी चिकनाई की भी जरुरत नहीं थी। साली को मचलने से फ़ुर्सत कहाँ थी कि उसको पता चलता कि कब उसकी बूर चुदनी शुरु हुई। वो जब मैंने उपर से हुमच-हुमच कर उसको चोदना शुरु किया तब उसने आँख खोल कर मुझे देखा। मैंने अपने होठ उसके होठ पर रख दिये और उसका रस-पान करते हुए उसके बूर की चुदाई करने लगा। करीब १० मिनट चोदने के बाद मैंने उसको कहा कि अब वो पलट जाए। पर उसमें जान कहाँ बाकि था। मैंने हीं उसको पलटा और फ़िर उसको ठीक से पोजीशन किया और फ़िर पीछे से उसकी चुदाई शुरु कर दी, "चुद साली कुतिया, बोल साली मजा आ रहा है कि नहीं तुम्हें। पाई थी कभी ऐसा मजा मेरी बुल्बुल।" उसे ऊँह-आह-इइइस्स्स्स्स्स्स्स से फ़ुर्सत हीं कहाँ था। साली बस अपनी चुदाई का मजा ले रही थी और मैं था कि उसे आज उसकी जवानी का भरपुर मजा दिला रहा था। ७-८ मिनट बाद फ़िर मैंने उसको चित लिटा दिया और उसके जाँघों के बीच उँकड़ू बैठ खुब तेजी से उसकी चुदाई कर दी।तभी वो दर्द या मजे की अधिकता से हल्के-हल्के चीखने जैसी आवाज निकालने लगी। उसके बूर की थड़थड़ाहट ने मुझे बता दिया कि साली झड़ गयी है, तभी मेरे लन्ड ने भी अपनी पिचकारी छॊड़ी और मेरा माल उसकी बूर में जड़ तक गिरने लगा। मेरे दिमाग में आया को चलो, आज एक और बूर को मेरे लन्ड ने अपना रस पिला दिया। वो भी अब थक गयी थी और मैं भी। हम दोनों थोड़ी देर शान्त पड़े रहे और फ़िर मैं कपड़े पहनने लगा। वो भी अपने कपड़े पहनी और फ़िर हम दोनों बाहर आ गये, देखा कि जमील और रागिनी आपस में बातें कर रह्ये हैं और जमील अब थोड़ा नौर्मल दिख रहा था। चेहरे पर का तनाव कम हो गया था।मैंने अब तक उसे बिस्तर पे लिटा दिया था और उसकी चुचियों को चुसना, मसलना शुरु कर दिया था। जल्दी हीं रंजिता कसमसाने लगी। मेरे जैसा अनुभवी रसिया के लिए तो वो नौसिखुआ थी। उसे बेचैन करने के बाद, मैं उसकी बूर की तरफ़ ध्यान देना शुरु किया। बूर की चटाई उसके लिए अनोखा अनुभव था। उसकी बूर मुझे एकदम कुँवारी बूर का मजा दे रही थी। उससे निकल रही खुश्बू मेरे लन्ड को टनटना चुकी थी। मैंने उसको जब पूरी तरह से तड़फ़ड़ाते हुए देखा तो उसके उपर चढ़ गया। उसके जाँघ खोले और फ़िर अपना लन्ड हौले-हौले साली के बूर में पेल दिया। उसके जवानी के रस से सराबोर बूर में लन्ड घुसाने के लिए किसी चिकनाई की भी जरुरत नहीं थी। साली को मचलने से फ़ुर्सत कहाँ थी कि उसको पता चलता कि कब उसकी बूर चुदनी शुरु हुई। वो जब मैंने उपर से हुमच-हुमच कर उसको चोदना शुरु किया तब उसने आँख खोल कर मुझे देखा। मैंने अपने होठ उसके होठ पर रख दिये और उसका रस-पान करते हुए उसके बूर की चुदाई करने लगा। करीब १० मिनट चोदने के बाद मैंने उसको कहा कि अब वो पलट जाए। पर उसमें जान कहाँ बाकि था। मैंने हीं उसको पलटा और फ़िर उसको ठीक से पोजीशन किया और फ़िर पीछे से उसकी चुदाई शुरु कर दी, "चुद साली कुतिया, बोल साली मजा आ रहा है कि नहीं तुम्हें। पाई थी कभी ऐसा मजा मेरी बुल्बुल।" उसे ऊँह-आह-इइइस्स्स्स्स्स्स्स से फ़ुर्सत हीं कहाँ था। साली बस अपनी चुदाई का मजा ले रही थी और मैं था कि उसे आज उसकी जवानी का भरपुर मजा दिला रहा था। ७-८ मिनट बाद फ़िर मैंने उसको चित लिटा दिया और उसके जाँघों के बीच उँकड़ू बैठ खुब तेजी से उसकी चुदाई कर दी।जमील और रागिनी दोनों ने हमें देखा, तो मैं मुस्कुराया और कहा, "मेरा तो हो गया जमील, अब तुम रंजिता को ले जा सकते हो, रात भर के लिए अब तुम्हारी है, जैसे चोदो।" रागिनी ने अब कहा, "इनको तो अभी सानिया की फ़िक्र हो रही है, कि पता नहीं कैसी होगी वहाँ, क्या बीत रही होगी उस पर।" मैंने मस्ती से कहा, "अब फ़िक्र छोड़ यार, और मस्ती कर। यहाँ हम सब मस्ती के लिए हीं आएँ हैं, सानिया लकी है कि उसको नए-नए अनुभव करने का मौका मिला। रागिनी कौल-गर्ल कहलाती है पर आज तक किसी गोरे से नहीं चुदी, और सानिया को देख क्या किस्मत है साली की, कि घर का माल होने के बावजूद उसे एक-दो नहीं तीन-तीन गोरे के साथ मस्ती करने का मौका मिला। अब उसकी फ़िक्र छोड़, मस्त हो कर चुद रही होगी वहाँ और तू साले यहाँ मुँह बनाए बैठा है।" जमील अब बोला, "यार बाबू, एक बार उस्को रिंग करके पूछ न, सब ठीक है कि नहीं, कोई तकलीफ़ तो नहीं है उसे?" मैंने भी सोचा कि चलो देख लेते हैं साली का क्या हाल है, सो मैंने उसे कौल कर दिया। ६-७ रिंग बाद उसकी थोड़ी साँस फ़ुली हुई सी आवाज आई-"हाँ चाचू बोलो..." मैं कहा-"अरे तेरे अब्बू तेरा हाल जानने के लिए बेचैन हैं?", और मैंने फ़ोन का स्पीकर औन कर दिया।उसे तो मस्ती चढ़ी हुई थी, उसे लगा कि उसका बाप उसकी चुदाई के बारे में जानना चाहता है (उसके बारे में नहीं), सो वह चहक कर बोली, "बहुत मजा आ रहा है चाचू, अभी तक तो किसी ने मुझे चोदा भी नहीं है. पर चुस-चाट कर बेदम कर दिया हैं इस साअले गोरों ने। अभी तो पुरी तरह नंगी भी मैं नहीं हुई हूँ। मेरे बदन पर से सिर्फ़ पैन्टी ही उतारी है इन हरामियों ने और बारी-बारे से मेरी चूत चुस रहे हैं, आउच....अभी साले ने मेरे चूत की चमड़ी को हल्के से दाँत से काट लिया, साला मादरचोद...अब्बू आप फ़िक्र मत करो। अब आ गयी हूँ तो पुरा मस्ती करुँगी, फ़िर पता नहीं ऐसा मौका मिले ना मिले। अभी जो प्लान है कि तीनों बारी-बारी से मेरी चुदाई करेंगे और फ़िर मुझे सोने के लिए छॊड़ देंगे। फ़िर रात में तीनों साथ मिल कर मुझे चोदेंगे। सच बहुत मजा आएगा। बाद में आऊँगी तब सब बताऊँगी सुबह।" इसके बाद उसके हाँफ़ने की आवाज आने लगी, तो मैंने फ़ोन बंद कर दिया।
जमील यह सब सुन कर एक ठंडी साँस भर कर कहा, "खैर अब तो उसकी मर्जी। जब तक कि सेक्स का मजा न मिला हो तब तक तो रोका जा सकता है, पर अगर एक बार सेक्स का मजा मिल गया, वो भी इस तरह तो फ़िर किसी को रोका नहीं जा सकता। म्झे तो अब यह डर है कि जब इसकी अम्मी तो यह सब पता चलेगा फ़िर क्या होगा?" मैंने हँसते हुए कहा, "यार इस डर का सिर्फ़ एक ही हल है, किसी तरह भाभी जी को भी एक बार सानिया के साथ भिरा दो। जैसे सानिया ने तुम्हें सीधा कर लिया वैसे हीं वो भाभी जी से भी निपट लेगी। तेरी बेटी अब चूत के मजा के लिए सब कर लेगी, तू परेशान न हो। अभी सिर्फ़ रंजिता की जवान खुश्बूदार चूत के बारे में सोच, कि कैसे इसकी रात भर बैन्ड बजाएगा। ५-७ बार से ज्यादा नहीं चुदी, मेरे से चुदाते हुए कराह दी थी यह बच्ची। इसकी तो आज तक झाँट भी नहीं छिली है। वियाग्रा लेगा क्या?" जमील की आँख में चमक आई, "तू लाया है क्या?" मैंने जेब से निकाल कर एक गोली दी, "ले साले तू भी क्या याद करेगा, अब जा बैन्ड बजा साली की। साले बेटी से कम उम्र की बच्ची को वियाग्रा खा कर चोदते हुए कुछ नहीं लगता और आज जब बेटी तीन गोरों से अपने तीनों छेद को (चूत, मुँह और गांड़) लन्ड से खुदवाने वाली है तो उसकी फ़िक्र में गान्ड़ फ़ट रही है। अब कल देखना अपनी बेटी का नंगा बदन तब पता चलेगा कि कैसे तीनों ने अपना पैसा वसूल किया है उस छिनाल को चोद कर। साली बहुत खुशी-खुशी गयी है रंडीपना दिखाने, अब पता चलेगा कि असल में रंडी को पेल कर कैसे पाई-पाई वसूला जाता है मर्दों के द्वारा।" जमील भी अब थोड़ा बेफ़िक्र हो कर कहा, ’हाँ यार, अब जब साली खुद रंडी बनना पसंद की है तो चुदे साली, मैं क्यों फ़िक्र करूँ।इसके बाद हम सब पास में ही इधर-उधर घुमने निकल गए। रंजिता लोकल थी, सो वो ही गाईड भी बनी हुई थी। हमने दिन का लंच साथ में पैक करा कर रख लिया था। एक जगह सुनसान में मैंने रागिनी को चोदा। वो पहली बार खुली हवा में बादल और सूरज के नीचे चुदी, खुब मस्त हो कर चुदी। जमील को मैंने कहा कि वो भी रंजिता को एक बार चोद ले, पर उसने मना कर दिया कि वो रात में हीं रंजिता कि चूत लेगा, अभी लेने से रात में वो बासी हो जाएगी। तब रागिनी में उसे कहा कि वो चाहे तो उसे चोद ले, पर जमील का मूड शायद नहीं था, या शायद वो अभी भी सानिया के बारे में सोच थोड़ी दुविधा में था। हमने उसे यो हीं छोड़ दिया।फ़िर हम एक फ़िल्म की मैटिनी शो देखने चले गए। शाम को करीब ७.३० में वापस कौटेज में आए और तब मैंने ही कहा कि एक बार सानिया से पूछता हूँ कि क्या सब हुआ, कैसा रहा दिन। फ़ोन मिला कर मैंने स्पीकर औन कर दिया। सानिया ने जो बताया, सब सुन रहे थे। उसने कहा कि करीब १ बजे तक तीनों ने उसे बारी-बारी से चोदा। हरेक ने अलग-अलग उसके बेड पर उसे मसला और कुल मिला कर लगातार करीब तीन घंटे उसे अपना बदन उन सब को सौंपना पड़ा। फ़िर सब लंच करके दिन में सो गए। अभी करीब आधे घंटे पहले हीं वो उठी है, और अब आज रात को सब मिल कर एक साथ उसके साथ सेक्स करेंगे। उन लोगों ने उसे कहा है कि वो भारी खाना न खाए, आज रात वो उसकी जम कर चुदाई करेंगे और गाँड़ भी मारेंगे। जमील अब बोला-"नहीं बेटा, यह मत करने देना, तुम्हें तकलीफ़ होगी, अभी बच्ची हो तुम।" अब सानिया सीधे अपने अब्बू से बोली-"अब्बू आप अब मुझे बच्ची कहना बंद कीजिए, इत्ना देख रहे है आप मुझे, खुद भी चोदे और आपको अभी तक मैं जवान नहीं दिख रही। वैसे भी, मैं इन लोगों से कुछ के लिए ना नहीं कहने वाली। ये सब सेक्स में एक्सपर्ट हैं, पता है सिर्फ़ मेरी चूत को चाट चूस कर इन लोगों ने मुझे दो बार मजा दिया। मेरे सामने एक ने अपनी गर्लफ़्रेन्ड की गांड़ मारी, पर इसके पहले सिर्फ़ गांड़ चाट चाट कर उसका ढ़ीला कर दिया और बड़े प्यार से उसमें घुसा दिया, लगा जैसे ये तो कई तकलीफ़ की बात हीं नहीं है।" जमील बोला-"पर बेटा, ये सब..."। सानिया-’बस अब्बू अब रहने दो, अच्छा न है, तुम्हारे लिए। तुमसे तो अपनी बेटी की गांड़ मारी नहीं जाएगी, सो अगर ये लोग मेरी गांड़ मार-मार कर उसे थोड़ा खोल देंगे तो तुम्हें भी आसानी होगी, मेरी गांड़ मारने में। ठीक है, अब कल सुबह बात करना, फ़िर बताऊँगी सब।", और फ़ोन कट गया।मुझे समझ आ गया कि सानिया ने अच्छी ऐक्टिंग की और ऐसे जताया कि उसकी गांड़ कोरी है, जबकि मुझे और रागिनी को पता है कि मैं उसकी गांड़ में पहले ही अपना लन्ड पेल चुका हूँ। साला बेवकूफ़ जमील अभी तक यह अंदाजा नहीं लगा पाया था कि उसकी बेटी की सील मैंने हीं खोला वर्ना वो समझ जाता कि मेरे जैसा गांडू उसकी ऐसी मस्त बेटी की गांड़ को कुँवारी तो आज तक नहीं हीं रहने देता। सच, मुझे अब उसकी बेवकूफ़ी पर तरस आ रहा था। मेरे दिमाग में तभी एक बात आई कि अब जब उसकी बेटी को रंडी बनाने का काम पूरा हो गया तो अब क्यों नहीं उसकी मस्त बीवी को एक बार शीशे में उतारा जाए। मैं अब लगातार इसी लाईन पर सोंच रहा था। जमील की बेटी सानिया एक दम एकहरे-छरहरे बदन की लौन्डिया थी तो उसकी बीवी दोहरे बदन की पूरी खीली हुई औरत। उसकी चूची भी बड़ी-बड़ी थी ३८ साईज की और उसकी कमर पर दो रेखाएँ भी बनी थी उसकी चूची की भार की वजह से। माँ भी बेटी जैसी हीं गोरी-चिट्टी थी। पर मस्ती उसमें कितनी थी, पता नहीं। सानिया की मस्ती हीं उसे जल्द हीं मेरी राह पर ले आई, पर उसकी अम्मी...., मैं यही सब सोच रहा था।खैर रात का खाना वाना खाने के बाद जमील ने वियाग्रा खा लिया, और बोला-"बाबू, आज रंजिता का गांड़ भी मारूँगा। जब वहाँ सानिया की गाँड़ वे लोग मारेंगे हीं तो यहाँ जो मिली है उसकी गाँड़ क्यों छोड़ दूँ?" रागिने ने अब चुटकी ली-"अंकल, वहाँ तो दीदी को इसका पैसा मिला है, यहाँ यह बेचारी तो फ़्री में मिली है आपको।" जमील भी अब धीरे-धीरे बदल रहा था, "फ़्री में नहीं मिली है ये लौन्डिया, मेरी बेटी वहाँ जा कर उन विदेशियों से चुदा रही है, इसके एवज में मैनेजर इसे यहाँ लाया है।" मैंने अब बात को लपका और अब तक की सबसे गंदी बात कह गया, "हाँ यार जामील, साले बेटीचोद, तुम इस हरामजादी रंजिता से पूरा पैसा वसूलो आज। तेरी बेटी तो वहाँ अपने बूर और गाँड़ में गोरे-गोरे लन्ड पेलवा-पेलवा कर लौन्डिया की कीमत चुका रही है। अब अगर तुम साली को पूरा नहीं निचोड़े को लानत है तुम पर की तेरी बेटी को तो सब चोदें और तू किसी की बेटी को ठीक से ना निचोड़े तो। समझ ले कि इस रंजिता को अल्लाह ने तेरे लिए हीं भेजा है, साली को फ़ाड़ देना आज। और वियाग्रा है मेरे पास अगर एक और लेना हो तो..." जमील ने नहीं में सर हिलाया और फ़िर रंजिता को अपनी गोदी में खींच लिया और हमें बोला की अब हम वहाँ से हट जाएँ। मैने भी रागिनी का हाथ पकड़ा और फ़िर बगल के रूम में चला गया।बिस्तर पर आने के बाद रागिनी अपने कपड़े खोलने लगी। वो बहुत हीं मुग्ध हो कर मुझे नंगा होते हुए देख रही थी। फ़िर वो बोली-"आज आप भी एक वियाग्रा खा लीजिए न अंकल। सच्ची, आप सब की बात से मुझे लग रहा है कि आज की रात मेरे लिए भी अनोखी हो तो मजा आ जाए।" यह सुन मैंने भी एक गोली खाली ली, और सोच लिया की साली रागिनी की बूर और गांड़ दोनों जब तक पड़पड़ाने नहीं लगेगी, उस छिनाल को नहीं छोड़ूँगा। जल्दी हीं मैं उस साली के उपर था और हरामजादी को भरपुर गालियाँ देते हुए चोद रहा था। शुरुआत मैंने उसको हरामजादी कह कर किया और फ़िर जल्द हीं रंडी, कुतिया, बप्चोदी, भाईचोदी, भोसड़ीवाली छिनाल, रंडी और न जाने क्या-क्या कह रहा था। वो मेरे जोए के धक्के खा रही थी और कराह रही थी। तभी बगल की रूम से लगा की रंजिता को जमील खुब जोर से चोद रहा है क्योंकि उसकी कराह्ट में रागिनी की कराहट वाली बात नहीं थी, उसे शायद दर्द हो रहा था। मैं रागिने पर से उतर गया, और बाहर की तरफ़ झांका, तो जो देखा रागिनी को इशारा किया कि वो भी देखे। जमील उसे पलट कर उसके गाँड़ में अपना लन्ड ठाँशने की कोशिश कर रहा था, और बेचारी की कोरी गाँड़ उस मादरचोद जमील का काला मोटा लंड भीतर ले नहीं पा रही थी।मुझे रंजिता पर दया आ गई, तो मैंने यही बात रागिनी को कहा। रागिनी भी रंजिता की हालत पर तरस खा बोली, "हमें कुछ करना होगा वर्ना ये साला अंकल उस बेचारी को ऐसा डरा देगा कि बेचारी अपने खसम से भी चुदाने में डरेगी आज के बाद।" मेरे हाँ में सर हिलाने पर, रागिने वैसे हीं नंगी उन दोनों की तरफ़ बढ़ गई। मैं भी पीछे चला। रागिनी ने जमील से कहा-"आ जाओ अंकल, मेरे गाँड़ में अपना लन्ड पेल लो। ये बेचारी अभी बच्ची है, इसको तो ठीक से अपना झाँट भी छिलने नहीं आता है...अभी क्या गाँड़ मरा पाएगी।" रंजिता यह सब सुन कर जैसे चैन पाई और उठ कर बिस्तर पर एक तरह खिसक गई जिससे रागिनी बिस्तर पर आ सके। जमील का काला खतना हुआ लन्ड अब दम तना हुआ था और उसका का गुलाबी सुपाड़ा एक दम लाल आलू बना हुआ था। लन्ड की नसें फ़ुली हुई थी। सब वियाग्रा का असर था। रागिनी अपने हाथों और घुटनों के बल एक कुतिया की तरह बिस्तर पर अपना पोजीशन ठीक की। उसकी गुलाबी बूर जिसमें अभी कुछ समय पहले मैं अपने हल्लाबी लन्ड को पेल कर भीतर घुच-पिलान का खेल खेलने में मगन था अब भी मेरे उस चुदाई के सबूत के तौर पर गीली हुई चमक बिखेर रही थी। मैंने रंजिता की तरफ़ नजर घुमाई तो देखा कि बेचारी रागिनी की उठी हुई चुतड़ और उसकी खुली हुई बूर पर नजर गड़ाए हुए है।रागिनी ने मुझे तब कहा कि मैं जरा उसकी गाँड़ को खोद दूँ जिससे वो थोड़ी ढ़ीली हो सके। रंजिता अब बोली, "ये साहब तो मेरी बिना ढ़ीली किए ही भीतर घुसा रहे थे, बहुत दर्द हो रहा था दीदी।" जमील बोला-"चुप कर अब साली रंडी, नखरे ना कर। रंडी बन कर चुदने आई है तो चुप-चाप चुद और फ़ूट ले हरामजादी।" मैंने अब जमील को कहा, "क्या यार, अब इस पर क्यों झल्ला रहे हो? बेचारी अभी नई है, धीरे-धीरे सब सीख जाएगी। तेरी बेटी भी धीरे-धीरे हीं सब सीखी है। अब देख वो वहाँ तीन के साथ चुदा रही है और खुब खुश है, और ये बेचारी एक तेरे जैसे मर्द को नहीं झेल पाई।" मैं अब तक रागिनी की गाँड़ में ऊँगली भीतर-बाहर कर के उसकी गांड़ को मस्त बना चुका था। वो अपना गांड़ को बिल्कुल ढ़ीला कर दी थी और मैं अब अपने दो ऊँगली थुक से गीली करके डाल कर उसे और लूज कर दिया तो वो बोली, "आ जाओ जमील अंकल आप अब मैं तैयार हूँ।" जमील ने बिना देर किए अपना लन्ड रागिनी की गाँड़ में पेल दिया। रागिनी एक बार दर्द से कराही और फ़िर अपने होठ भींच लिए। रंजिता देख रही थी कि कैसे सब भीतर गया। जब पूरा छः ईंच लन्ड भीतर घुस गया तो जमील अब उसकी गांड़ मारने लगा हौले-हौले। मैंने रंजिता को धीरे से कहा, "देख लिया कैसे मर्द लोग चोदते है एक लौन्डिया को। लड़की को सिर्फ़ मर्दों से बूर हीं नहीं चुदाना पड़ता, उन्हें मर्दों से गाँड़ भी मरवानी पड़ती है। इसकी खुद की बेटी आज बगलवाले कौटेज में तीन-तीन मर्दों के साथ सोई है। साली को आज पहली बार उसकी तीनों छेद में पेला जाएगा। इसीलिए ये साला जमील यहाँ लौन्डिया की गाँड़ मार कर अपना गम कम कर रहा है। साला एक दम मादरचोद, बेटीचोद हरामी है।" रंजिता अब सब समझी और उसकी आँख आश्चर्य से फ़ट गई, "क्या सच इनकी अपनी बेटी..."। मैंने कहा, "हाँ, साला मेरा दोस्त है। ये जितना चपन्डुक है, इसकी बेटी उतना हीं बड़ा माल। साली जब पूरे कपड़े में होती है तब भी मर्दों के लन्ड से पानी निकाल देती है। उसे मैं आराम से चोद सकूँ, इसलिए मैंने उसे इस मादरचोद से बी चुदावा दिया। अब जब साला खुद अपनी बेटी को चोद चुका है तब कैसे उसको दुसरों से चुदाने से मना करे। सो अब ये मादर-चोद ऐसे हीं अपनी खीज निकालता रहता है। तुम फ़िक्र छॊड़ो और आओ एक बार मेरे से चुदा लो। मैं तुम्हें प्यार से चोद कर तुम्हारी जवानी का पूरा मजा दुँगा।" वो अब रागिनी की तरफ़ ईशारा करके बोली-"यह कौन है, आपकी बेटी?" मैं हंस पड़ा-"नहीं ये एक रंडी है, बहुत ही प्यारी रंडी पर अब मेरे साथ अंकल और भतीजी का रिश्ता है।" और मैंने उसे अपनी गोद में खींच कर उसके होठ चुसने शुरु कर दिए और जल्द हीं वो भी गर्म हो गई और मेरा साथ देने लगी। फ़िर तो उस रात रंजिता एक बार मुझसे और दो बार जमील से बूर में चुदी। रागिनी की एक बार गाँड़ जमील ने मारी और फ़िर दो बार वो मेरे से अपने बोर्र में चुदी। अंत में रंजिता भी सब देख कर जोश में आ गई और बोली कि एक बार मेरी भी गांड़ मार दीजिए आप। मैंने उसे समझाया, "गाँड़ मार दीजिए नहीं गाँड़ माए लीजिए कहो। लड़की देती है और मर्दलोग लेते हैं। मैं तुम्हारी चूत लेता हूँ, तुम अपना चूत देती हो। मैं गाँड़ मारता हूँ, तुम गाँड़ मरवाती हो। मैं तुम्हें चोदता हूँ, तुम चुदवाती हो। लड़की चोदती नहीं चुदाती है। जैसे हिन्दीं में आप और तुम दो शब्द है और अंग्रेजी में सिर्फ़ यू, उसी तरह हिन्दी में चुदना और चुदाना दो शब्द है जबकि अंग्रेजी में सिर्फ़ फ़क। अब कुछ समझ में आया।" रागिनी हंस दी, "अंकल आप तो पूरा क्लास हीं लगा के बैठ गए। बेचारी अब तड़प रही है तो एक बार उसकी गांड़ भी अपने लन्ड से खुजला दीजिए। मैं तो अब थक गई हूँ, बस अब बैठ कर देखुँगी सब।" मैंने कहा-"अरे ये बेचारी जब रंडी हीं बन रही है तो कुछ ठीक से बोलना सीख लेगी तो ज्यादा पैसा मिलेगा। आओ रंडी पास आ कर कुतिया बन, फ़िर तेरी गाँड़ को गीला और ढ़ीला करके उसको मारुँगा।" रंजिता भी पास आ कर जैसे रागिनी अपना गाँड़ मरवाते समय पलट कर रेडी हुई थी वैसे ही वो भी हो गई, तो मैं हौले-हौले उसके गाँड़ अपनी बीच वाली ऊँगली से खोदने लगा। जल्द ही मैंने समझ लिया कि क्यों बेचारी जमील से गाँड़ मरवाते समय तड़प रही थी। असल में जैसे हीं मैं उसकी गाँड़ में अपनी ऊँगली घुसाने की कोशिश करता वो अपना गाँड़ का चेद सिकोड़ लेती। बस मैंने उसको समझाया कि कैसे उसे रीलैक्स करना है। वो अच्छी स्टुडेन्ट थी, जल्दी ही सीख गई और फ़िर कुछ ही समय में वो मेरी दो ऊंगली भीतर घुसवा ली। फ़िर मैंने उससे कहा कि अब वो जब समझ गई कि कैसे अपना गाँड़ उसे खोलना है कि लन्ड भीतर घुस सके, तो अब वो मेरे लन्ड को चुस कर टनटना दे जिससे उसके छोटे से गांड़ में वो घुस कर उसके इस छेद की भी चुदाई कर सके।रंजिता खुशी-खुशी मेरे लन्ड को अपने मुँह में ले कर चुसने लगी। जल्द हीं मेरा लन्ड फ़नफ़ना गया और नये बिल में घुसने के लिए फ़ुँफ़कारने लगा। मैंने हल्के हाथों से रंजिता को पलट दिया। वो सब समझ कर सही पोज में आ गई, और मैंने उसकी गाँड़ पर ढ़ेर सारा थुक लपेसा और अपना लन्ड उसकी कोरी गाँड़ की छेद पर भिरा कर धीरे-धीरे दबाने लगा। मेरा सुपाड़ा भीतर चला गया, रंजिता का बदन हल्के से कांपा था, शायद दर्द से। मैंने उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथों से जकड़ लिया था और फ़िर अपना लन्ड बाहर खींच लिया।। वो फ़िर कांपी, उसे पता चल गया कि मैं क्या कर रहा हूँ। ऐसे ही तीन बार मैंने अपना सुपाड़ा उसकी गाँड़ में पेला और खींचा, और फ़िर चौथी बार मैंने अपना सुपाड़ा भीतर किया तो रंजिता की गांड़ को मेरे लन्ड के सुपाड़े की आदत पर गयी थी सो इस बार उसका बदन नहीं के बरा बर कांपा। मैंने यह सब महसूस किया और इस बार उसकी कमर को पुरे से जकड़ कर जोर से लन्ड भीतर ठांस दिया। वो दर्द से बीलबीलाने लगी पर मैंने बिना रुके अपन लन्ड करीब ६" भीतर ठांस दिया। उसकी आंखो से आंसू निकल गए, रागिनी के चेहरे से रंजिता के दर्द का अंदाजा मुझे हो रहा था पर मेरे जैसे हरामी को लौन्डिया के दर्द से कुछ होना तो था नहीं जब माल खुद अपनी मर्जी से अपनी गांड़ फ़ड़वा रही थी तो। सो मैं पूरी बेदर्दी से उसकी गाँड़ में लन्ड भीतर बाह्र करके उसकी कुँवारी गांद का लुत्फ़ उठाने लगा। जल्दी हीं उसे भी मजा आने लगा तो वो भी साथ देने लगी। लौन्डिया की यही मस्ती वो चीज है जिसकी वजह से मैं किसी भी लौन्डिया को चोदते समय उसके दर्द की परवाह नहीं करता। मुझे पता है कि लड़की जैसे हीं १३-१४ की उमर के करीब होती है, वो कैसा भी लन्ड अपने भीतर डलवा सकती है। उसके बदन की बनावट हीं ऐसी है। यहाँ तो यह कुतिया कम से कम १८ की जरुर थी। सो जल्द हीं मस्ती पा मस्त हो गई और फ़िर मजे ले कर अपना गाँड़ मरवाई।करीब १४-१५ मिनट की चुदाई या कहिए गांड़ मराई के बाद मैं उसकी गांड़ में हीं झड़ गया, और जब अपना लन्ड बाहर खींचा तो तो अपने गांड़ के छेद को भींची और तब उसकी गांद में से मेरा सफ़ेद माल बाहर बह निकला। साली के गांड़ का उदघाटन हो चुका था। रात के करीब १२ बज चुके थे, सो हम सब अब सो गए। सोते समय दिमाग में एक बात थी कि सानिया साली का क्या हो रहा है वहाँ, सोचा कि चलो सुबह सब पता चल जाएगा।सुबह सबसे पहले रागिनी की आँख खुली। उसने जब खिड़की का पर्दा हटाया तो रोशनी से हम सब जग गए। सब ऐसे हीं नंग-धड़ग सो गए थे। रंजिता उठी तो अपने हाथ से अपने बूर को कवर करते हुए उठी और बोली, बाप रे बहुत देर हो गया, अब घर जा कर जल्दी-जल्दी सब काम करना होगा। उसको अभी अपने छोटे भाई बहन को खाना बना कर ९ बजे तक स्कूल भेजना था। पता चला कि उसकी माँ नहीं है और बाप शराबी है। उसका बाप एक बोतल विदेशी शराब के बदले उसे रात भर के लिए मैनेजर के साथ भेजा था। ऐसा आज तीसरी बार हुआ था। रंजिता ने बताया कि उसको अब २००० रू० मिलेगा मैनेजर से, तो मुझे दया आ गई और मैंने उसे २००० और दिए, और अपने शेविंग किट से बोरोलिन दिया की वो उसे अपने गांद के छेद पर लगाया करे। मैंने देखा कि कल कि गाँड़ मराई के चक्कर में उसकी गाँड़ के छेद के फ़ोल्ड्स थोड़ा छिल गए थे। मैंने उसके गांड़ के छेद पर पहली बार अपने हाथ से बोरोलिन लगाया। साली इतना प्यार पा कर पिघल गयी, पर हम सब ने उसे विदा कर दिया। तभी जमील के फ़ोन पर सानिया का फ़ोन आया।