Wednesday, 13 April 2011

भाभी ने चोदना सिखाया

यह उस समय की बात है जब मैं २० सल् का था. बाडे भाई की शादी सिर्फ़ एक साल ही हुआ था. हम दो भाई और एक बहन है जिसकी शादी पहले ही हो गयी है. मेरे माता पीता बहुत ही धार्मीक वीचार के है और हमेशा धर्मं करम मे लगे रहते है. मेरे बारे भाई का रेडीमेड कप्डॉ का कारोबार है और अक्सर वो अपने कम के सील्सिले मे दुसरे शहर मे टूर पर जाते रहते हैं. मैं तब law पढ़ रह था. मेरी भाभी मुझको बहुत चाहती थी, क्योंकी एक मैं ही तो था जीस'से की भाभी बातचीत कर सकती थी खास कर जब भैया business के कम से आफिस या टूर पर बहार जाते थे.

मेरी भाभी बहुत प्यार से हमारा ख्याल रखती थे और क्भी इह अहसास नही होने देती की मैं घर पर अकेला हूँ. वो मुझे प्यार से लाला कह कर पुकारती थे और मैं हमेशा उनके पास रहना पसंद कर्ता था. वो बहुत ही सुन्दर थी, एकदम गोरी चिट्टी लुम्बे लुम्बे काले बाल करीब ५'५" और फिगुर ३८-२४-३८ था. मैं उनकी चूची पर फीदा था और हमेशा उनकी एक झलक पाने के लीये बेताब रहता था. जब-भी कम करते वक़्त उनका अंचल उनकी छाती पर से फिसल कर नीचे गिरता था या वो नीचे झुकती, मैं उनकी चुंची की एक झलक पाने के कोशीश कर्ता था. भाभी को इस-बात का पता था और वो जानबूझ कर मुझे अपनी चुंची का जलावा दीखा देती थी.
यह बात तब की हैं जब मेरे भैया काम के सील्सिले मे शादी के बाद पहली बार बहार गए. माँ और बाबूजी पहले से ही तीर्थ यात्रा पर हरिद्वर गए हुए थे और करीब एक महीने बाद लौटने वाले थे. भाभी पर ही घर सम्हालने की जिम्मेदारी थे. भैया ने मुझे घर पर रख कर परही करने की सलाह दी, क्योंकी examination नजदीक था और साथ ही मे भाभी को भी अकेलापन महसूस ना हो. अगले दीन सुबह के १० बजे की बस से भैया चले गए. हम दोनो भैया को बस स्टैंड तक बीदा करने गए.
भाभी उस्दीन बहुत ही खुस थी. जब हमलोग घर पहुंचे तो उन्होने मुझे अपने कमरे मे बुलाया और कहा की उन्हें अकेले सोने की आदत नही है और जबतक भैया वापस नही आते, मैं उनके कमरे मे ही सोया करूं. उन्होने मुझसे अपनी कीताब वहीं ला कर पढ़ने को कहा. मैं तो खुसी से झूम उठा और फ्ताफात अपनी टेबल और कुछ किताबे उनके कमरे मे पहुँच ग्या . भाभी ने खाना पकाया और हम दोनो साथ साथ खाना खाया. आज वो मुझपर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी और बार बार कीसी ना कीसी बहाने से अपनी चुंची का जलवा हमे दीखा रही थी. खाने के बाद भाभी ने हमे फल खाने को दीया. फल देते वक़्त उन्होने मेरा हाथ मसल दीया और बाडे ही मादक अदा से मुस्कुरा दीया.
मैं शर्मा गया क्योंकी यह मुस्कान कुछ अलग कीस्म की थी और उसमे शरारत झलक रही थी. खाने के बाद मैं तो पढ़ने बैठ गया और वो अपने कपरे change करने लगी. गरमी के दीन थे और गरमी कुछ जयादा ही थी. मैं अपना शर्ट और बनियान उतर कर केबल पैंट पहन कर पढ़ने बैठ गया. मेरी टेबल के ऊपर दीवार पर एक शीशा टंगा था और भाभी को मैं उस शीशे मे देख रह था. वो मेरी तरफ देख रही थी और अपना कापडे उतार रही थे. वो सोच भी नहीं सकती थी की मैं उनको शीशे के अंदर से देख रह था. उन्होने अपना blouse खोल कर उतर दीया. हाय क्या मदमस्त चुंची थी. मैं पहली बार लेस वाली ब्रा मे बंधे उनके चूची को देख रह था. उनकी चुंची काफी बरी बरी थी और वो ब्रा मे समां नहीं रही थी. आधी चुंची ब्रा के ऊपर से झलक रही थी.
कप्रे उतार कर वो बीसत्र पर चीत लेट गयी और अपने सीने मे एक झीनी से चुन्नी धक् ली. एक पल के लीये तो मेरा मन कीया की मैं उनके पास जा कर उनकी चुंची को देखू, फीर सोचा यह ठीक नही होगा और मैं पढ़ने लग गया. लेट'ते ही वो सो गयी और कुछ ही देर मे उनका दुप्पत्ता उनके छाती से सरक गया और सांसों के साथ उठती बैठती उनकी मस्त रसेली चुंची साफ साफ दीख रह थी. रत के बारह बज चुके थी. मैं पराही बंद की और बत्ती बुझाने ही वाला था की भाभी की सुरीली आवाज मेरे कानो मे परी,
"लाला यहाँ आऊँ ना." मैं उनकी तरफ बा, अब उन्होने अपनी चुंची को फीरसे दुप्पत्ते से ढँक लीया था. मैंने पुछा,
"क्या है भाभी?' उन्होने कहा,
"लाला जरा मेरे पास ही लेट जाओ ना, थोरी देर बात करेंगे फीर तुम अपने बीसत्र पर जा कर सो जाना." पहले तो मैं हिच्कीचाया लेकिन फीर मान गया. मैं लूंगी पहन कर सोता था और अब मुझको पैंट पहन कर सोने मे दिक्कत हो रही थी. वो मेरी परेशानी तार गयी और बोली,
"कोई बात नही, तुम अपनी पैंट उतार दो और रोज जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ. शर्मो मत. आऊँ ना." मुझे अपने कान पर यकीन नही हो रह था. लूंगी पहन कर मैं ने लाइट बंद कर दीं और night लैंप जला कर मैं बीसत्र पर उनके पास लेट गया. जीस बदन को महीनो से नीहर्ता था आज मैं उसी के पास लेटा हुआ था. भाभी का अध्नंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. मैं ऐसे लेटा था की उनकी चुंची बिल्कुल नंगी मालुम दे रही थी, थोरा सा हीस्सा ही ब्रा मे छुपा था. क्यया हसीं नजारा था. तब भाभी बोली,
"इतने महीने से अकेले नही सोई हूँ और अब आदत नही है अकेले सोने की." मैं बोला,
"मैं भी कभी कीसी के साथ नही सोया." वो जोर से खिलखिलाई और बोली,
"अनुभव ले लेना चाहिए जब भी मौका मीले, बाद मे काम आएगा." उन्होने मेरा हाथ पाकर कर धीरे से खींच कर अपने उभरे हुए चुंची पर रख दीया और मैं कुछ नहीं बोल पाया लेकीन अपना हाथ उनके चुंची पर रखा रहने दीया.
"मुझे येहाँ कुछ खुजा रह है, जरा सहलाओ ना." मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी चुंची को सहलाना शुरू की. भाभी ने मुझे ब्रा के कप मे घुसा कर सहलाने को कहा और मेरा हाथ ब्रा के अंदर कर दीया. मैंने अपना पुरा हाथ अंदर घुसा कर जोर जोर से उनकी चुंची को रागार्ना शुरू कर दीया. मेरी हथेली की रगर पा कर भाभी के निप्प्ले कडे हो गए. मुलायम मांस के स्पर्श से मुझे बहुत अच्छा लग रह था लेकीन ब्रा के अंदर करके मसलने मे मुझे दिक्कत हो रही थी. अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा कर बोली,
"लाला यह ब्रा का हूक खोल दो और ठीक से सहलाओ." मैंने कांपते हुए हाथों से भाभी की ब्रा की हूक खोल दीया और उन्होने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल दीया. मेरे दोनो हातों को अपने नंगी छाती पर ले जा कर वो बोली,
"थोरा कास कर दबाव ना." मैं भी काफी उत्तेजीत हो गया और जोश मे आकार उनकी रसीली चुंची से जम कर खेलने लगा. क्यया बरी बरी चुंचेया थी. कडी कडी चुंची और लउम्बे लउम्बे निप्प्ल. पहली बार मैं कीसी औरत की चुंची को छू रह था. भाभी को भी मुझसे अपने चुंची की मालिश करवाने मे मज़ा अरह था. मेरा लंड अब कडा होने लगा था और अंडरवियर से बहार निकलने के लीये जोर लगा रह था. मेरा ९" का लंड पुरे जोश मे आ गया था. भाभी की चुंची मसलते मसलते हुए मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा लंड उनकी जन्घो मे रगर मरने लगा था. अचानक वो बोली,
"लाला यह मेरी टांगो मे क्यया चुभ रहा है?" मैंने हिम्मत करके जबाब दीया,
"यह मेरा हतीयर है. तुमने भैया का हतीयर तो देखा होगा ना?" हाथ लगा कर देखूं? उन्होने पुछा और मेरे जबाब देने से पहले अपना हाथ मेरे लंड पर रख कर उसको टटोलने लगी. अपनी मुट्ठी मेरे लंड पर कास के बंद कर ली और बोली,
"बापरे, बहुत काडक है." वो मेरी तरफ घुमी और अपना हाथ मेरे अंडरवियर मे घुसा कर मेरे फर-फ़राते हुए लंड को elastic के ऊपर निकल लीया. लंड को कस कर प्कडे हुए वो अपना हाथ लंड के तक ले गयी जिससे सुपाडा बहार अ गया. सुपाडे की साइज़ और अकार देख कर वो बहुत हैरान हो गयी.
"लाला कहॉ छुपा रखा था इतने दीन" उन्होने पुछा. मैंने कहा,
"यहीं तो था तुम्हारे सामने लेकीन तुमने धयान नही दीया." भाभी बोली,
"मुझे क्यया पता था की तुम्हारा इतना बारा होगा, छोटे भाई का लौडा बाडे भाई के लौडे से बारा भी हो सकता है, यह मैं सोच भी नही सकती थी." मुझे उनकी बिन्दास बोली पर असचार्य हुआ जब उन्होने "लौडा" कहा और साथ ही मुझे बारा मज़ा आया. वो मेरे लंड को अपने हाथ मे लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी. फीर भाभी ने अपना पेटतीकोअत अपनी क़मर के ऊपर उठा लीया और मेरे ताने हुए लंड को अपनी जन्घो के बिच ले कर रागारने लगी. वो मेरी तरफ कर्व्ट ले कर लेट गयी ताकी मेरे लंड को ठीख तरह से पकड सके. उनकी चुंची मेरे मुँह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था. अचानक उन्होने अपनी एक चुंची मेरे मुँह मे ठेलते हुए कहा,
"चुसो इनको मुँह मे लेकर." मैंने उनकी लेफ्ट चुंची अपने मुँह मे भर लीया और जोर जोर से चूसने लगा. थोरे देर के लीये मैंने उनकी चुंची को मुँह से निकला और बोला,
"मैं हमेशा तुम्हारे blouse मे कासी चुंची को देखता था और हैरान होता था. इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दील कर्ता था की इन्हें मुँह मे लेकर चुसू और इनका रुस पीउं. पर डरता था पता नही तुम क्यया सोचो और कंही मुझसे नाराज़ ना हो जाओ. तुम नही जानती भाभे की तुमने मुझे और मेरे लंड को कीतना परेशां की है?"
"अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जीं भर कर दबाओ, चुसो और मज़े लो; मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ जैसा चाहे वैसा ही करो" भाभी ने कहा. फीर कया था, भाभी की हरी झंडी पकड मैं टूट परा भाभी की चुंची पर. मेरी जीभ उनके कडे निप्प्ल को महसूस कर रही थी. मैंने अपनी जीभ भाभी के उठे हुए कडे निप्प्ल पर रख दीं. मैंने दोनो अनारों को कस के प्कडे हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था. मैं ऐसे कस कर चुंचीओं को दबा रहा था जैसे की उनका पुरा का पुरा रुस नीचोर लूँगा. भाभी भी पुरा साथ दे रही थी. उनके मुह्ह से "ओह! ओह! अह! स, स! की आवाज नीकल रही थी. मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड रही थी. उन्होने अपनी लेफ्ट टांग को मेरे जांघ के ऊपर चारा दीया और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच रख लीया. मुझे उनकी जांघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ. यह उनकी चूत थी. भाभी ने पैंटी नही पहन राखी थी और मेरा लंड का सुपाडा उनकी झांटो मुझे घूम रहा था. मेरा सब्र का बाँध टूट रहा था. मैं भाभी से बोला,
"भाभी मुझे कुछ हो रहा और मैं अपने आपे मे नही हूँ, please मुझे बताओ मैं क्यया करों?" भाभी बोली,
"तुमने कभी कीसी लार्की को चोदा है आज तक?" मैंने बोला, "नही."
"कितने दुःख की बात है. कोई भी लार्की इससे देख कर कैसे मना कर सकती है. शादी तक ऐसे ही रहने का इरादा है क्यया?" मैं क्यया बोलता. मेरे मुँह मे कोई शब्द नही थे. मैं चुपचाप उनके चेह'रे को देखते हुए चुंची मसलता रहा. उन्होने अपना मुँह मेरे मुँह से बिल्कुल सता दीया और फुसफुसा कर बोली,
"अपनी भाभी को चोदोगे?'
"का का का क्यों नही" मैं बारी मुशकील से कहा पाया. मेरा गला सुख रहा था. वो बाडे मादक अंदाज़ मे मुस्कुरा दी और मेरे लंड को आजाद करते हुए बोली,
"ठीक है, लगता है अपने अनाडी देवर राजा को मुझे ही सब कुछ सीखना पडेगा. पर गुरु दखशिना पुरे मान से देना. चलो अपनी चढी उतार कर पुरे नंगे हो जाओ." मैं पलंग पर से उतेर गया और अपना अंडरवियर उतार दीया. मैं अपने ताने हुए लंड को लेकर नंग धरंग अपनी भाभी के सामने खरा था. भाभी अपने रसेली होटों को अपने दांतो मे दबा कर देखती रही और अपने प्र्तिकोअत का नारा खींच कर ढेला कर दीया.
"तुम भी इससे उतार कर नंगी हो जाओ" कहते हुए मैंने उनका पेटतीकोअत को खींचा. भाभी अपने चुतड ऊपर कर दींये जिससे की पेटतीकोअत उनकी टांगो से उतेर कर अलग हो गया. भाभी अब पूरी तरह नंगी हो कर मेरे सामने चीत पडी हुई थी. भाभी ने अपनी टांगो को फैला दीया और मुझे रेशमी झांटो के जंगल के बीच छुपी हुए उनकी रसीले गुलाबी चूत का नज़ारा देखने को मीला. night लैंप की हल्की रौशनी मे चमकते हुए ननागे जिस्म को देखकर मैं उत्तेजीत हो गया और मेरा लंड मारे ख़ुशी के झुमने लगा. भाभी ने अब मुझसे अपने ऊपर चर्ने को कहा. मैं तुरंत उनके ऊपर लेट गया और उनकी चुंची को दबाते हुए उनके रसीले होंट चूसने लगा. भाभी ने भी मुझे कस कर अपने अलिंगन मे कस कर जाकड लीया और चुम्मा का जवाब देते हुए मेरे मुँह मे अपनी जीभ ठेल दीया. हाय क्यया स्वदिस्त और रसीले जीभ थी. मैं भी उनकी जीभ को जोर शोर से चूसने लगा. हमारा चुम्मा पहले प्यार के साथ हलके मे था और फीर पुरे जोश के साथ.
कुछ देर तक तो हम ऐसे ही चिपके रहे, फीर मैं अपने होंट भाभी की नाज़ुक गाल्लों पर रख रगर कर चूमने लगा. फीर भाभी ने मेरी पीठ पर से हाथ ऊपर ला कर मेरा सर पकड लीया और उसे नीचे की तरफ ठेला. मैं अपने होंठ उनके होंतो से उनकी थोड़ी पर लाया और कंधो को चूमता हुआ चुंची पर पहुँचा. मैं एक बार फीर उनकी चुंची को मसलता हुआ और खेलता हुआ कटने और चूसने लगा. उन्होने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से नीकाल लीया और हमारी तंगी एक-दुसरे से दूर हो गए. अपने दायें हाथ से वो मेरा लंड पकड कर उसे मुट्ठी मे बाँध कर सहलाने लगी और अपने बाएं हाथ से मेरा दाहिना हाथ पकड कर अपनी टांगौ के बीच ले गयी. जैसे ही मेरा हाथ उनकी चूत पर पहुँच उन्होने अपनी चूत के दाने को ऊपर से रगर दीया. समझदार को इशारा काफी था. मैं उनके चुंची को चुस्त हुआ उनकी चूत को रगड़'ने लगा.
"लाला अपनी उंगली अंदर डालो ना?" कहती हुए भाभी ने मेरी उंगली अपनी चूत के मुँह पर दबा दीया. मैंने अपनी उंगली उनकी चूत के दरार मे घुसा दीया और वो पूरी तरह अंदर चली गए. जैसे जैसे मैंने उनकी चूत के अंदर का मुईना की मेरा मज़ा बारता गया. जैसे ही मेरा उंगली उनके चूत के दाने से टकराया उन्होने जोर से सिस्कारी ले कर अपनी जांघों को कस कर बंद कर लीया और चुतड उठा उठा कर मेरे हाथ को चोद्ने लगी. उनकी चूत से पानी बहा रहा था. थोरी देर बाद तक ऐसे ही मज़ा लेने के बाद मैंने अपनी उंगली उनकी चूत से बहार नीकल लीया और सीधा हो कर उनके ऊपर लेट गया. भाभी ने अपनी टंगे फैला दी और मेरे फर्फराते हुए लंड को पकड कर सुपाडा चूत के मुहाने पर रख लीया. उनकी झांटो का स्पर्श मुझे पागल बाना रहा था, फीर भाभी ने कहा,
"अब अपना लौडा मेरी बुर मे घुसो, प्यार से घुसेर्ना नहीतो मुझे दर्द होगा, अह्ह्ह्छ!" मैं क्योंकी नौसिखीया था इसीलिए शुरू शुरू मे मुझे अपना लंड उनकी tight चूत मे घुसाने मे काफी परेशानी हुई. मैं जब जोर लगा कर लंड अंदर ठेलना चाहा तो उन्हें दर्द भी हुआ. लेकीन पहले से उंगली से चुद्वा कर उनकी चूत काफी गीली हो गए थी. भाभी भी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दीखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरे एक ही धक्के मे सुपाडा अंदर चला गया. इससे पहले की भाभी संभले या आसान बदले, मैंने दुसरा धक्का लगाया और पुरा का पुरा लंड मख्हन जैसे चूत की जन्नत मे दाखिल हो गया. भाभी चिल्लाई,
"उईई ईईईइ ईईइ माआया उहुहुह्ह्ह्छ ओह लाला, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नही, ही! बारा जलीम हाय तुम्हारा लंड. मर ही डाला मुझे तुमने देवर राजा." भाभी को काफी दर्द हो रहा लगता है. पहेली बार जो इतना मोटा और लुम्बा लंड उनके बुर मे घुसा था. मैं अपना लंड उनकी चूत मे घुसा कर चुप चाप पडा था. भाभी की चूत फडक रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौडे को मसल रही थी. उनकी उठी उठी चुंची काफी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थी. मैंने हाथ बारह कर दोनो चुंची को पकड लीया और मुँह मे लेकर चूसने लगा. भाभी को कुछ रहत मिली और उन्होने क़मर हिलनी शुरू कर दी. भाभी मुझसे बोली,
"लाला शुरू करो, चोदो मुझे. लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्ज्ज्जा," और अपनी गांड हिलाने लगी. मैं ठहरा अनारी. समझ नहीं पाया की कैसे शुरू करूं. पहले अपनी क़मर ऊपर की तो लंड चूत से बहार आ गया. फीर जब नीचे की तो ठीक निशाने पर नही बैठा और भाभी की चूत को रागार्ता हुआ नीचे फिसल कर गांड मे जाकड फँस गया. मैंने दो तीन धक्के लगाया पर लंड चूत मे वापस जाने की बजाई फिसल कर गांड मे चला जता. भाभी से रहा नही गया और तिलमिला कर ताना देती हुई बोली,
" अनारी का चोदना और चूत का सत्यानाश, अरे मेरे भोले राजा जरा ठीक से निशाना लगा कर ठेलो नही तो चूत के ऊपर लौडा रगर रगर कर झड जाऊगे." मैं बोला,
"भाभी अपने इस अनारी देवर को कुछ सिखाओ, ज़िन्दगी भर तुम्हे गुरु मनुगा और लंड की दकशिना दूंगा." भाभी लुम्बी संस् लेटी हुए बोली,
"हाँ लाला, मुझे ही कुछ करना होगा नही तो देवरानी आकार कोसेगी की तुम्हे कुछ नही सिखाया." मेरा हाथ अपनी चुंची पर से हटाया और मेरे लंड पर रखती हुई बोली,
"इससे पकड कर मेरी चूत के मुँह पर रख्हो और लगाओ धक्का जोर से." मैंने वैसे ही की और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ पुरा का पुरा अंदर चला गया. फीर भाभी बोली,
"अब लंड को बहार निकालो, लेकीन पुरा नही. सुपाडा अंदर ही रहने देना और फीर दोबारा पुरा लंड अंदर पेल देना, बस इस्सी तरह से करते रहो." मैंने वैसे ही करना शुरू की और मेरा लंड धीरे धीरे उनकी चूत मे अंदर-बहार होने लगा. फीर भाभी ने स्पीड बाडा कर करने को कहा. मैंने अपनी स्पीड बाडा दीं और ताजी से लंड अंदर-बहार करने लगा. भाभी को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से क़मर उठा उठा कर हर शोट का जवाब देने लगी. लेकीन जयादा स्पीड होने से बार बार मेरा लंड बहार नीकाल जता. इससे चुदाई का सिल्सिला टूट जता. अखीर भाभी से रहा नही गया और करवट ले कर मुझे अपने ऊपर से उतार दीया और मुझको चीत लेटा कर मेरे ऊपर च्ड गयी. अपनी जांघों को फैला कर बगल कर के अपने गद्देदार चुतड रखकर बैठ गयी. उनकी चूत मेरे लंड पर थी और हाथ मेरी क़मर को प्कडे हुए थे और बोली,
"मैं दिखाती हूँ की कैसे चोद्ते है," और मेरे ऊपर लेट कर धक्का लगाया. मेरा लंड घप से चूत के अंदर दाखिल हो गया. भाभी ने अपनी रसीली चुंची मेरी छाती पर रागारते हुए अपने गुलाबी होंट मेरे होंट पर रख दिए और मेरे मुँह मे जीभ ठेल दीया. फीर भाभी ने मज़े से क़मर हीला हीला कर शोट लगना शुरू कीया. बाडे कस कस कर शोट लगा रही थी मेरी प्यारी भाभी. चूत मेरे लंड को अपने मे समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी. मुझे लग रहा था की मैं जन्नत मेँ पहुंच गया हूँ.
अब पोसिशन उल्टी हो गयी थी. भाभी मनो मर्द थी जो की अपनी मशुका को कस कस कर चोद रहा था. जैसे जैसे भाभी की मस्ती बढ़ रही थी उनके शोट भी तेज़ होते जा रहे थे. अब भाभी मेरे ऊपर मेरे कंधो को पकड लार घुटने के बाल बैठ गयी और जोर जोर से कमर हीला कर लंड को तेज़ी से अंदर-बहार लेने लगी. उनका सारा बदन हील रहा था और सांसे तेज़ तेज़ चल रही थी. भाभी की चुन्चीया तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी. मुझसे रहा नही गया और हाथ बाडा कर दोनो चुंची को पकड लीया और जोर जोर से मसलने लगा. भाभी एक सधे हुए खिलाडी की तरह कमान अपने हाथों मे लीये हुए और कस कस कर शोट लगा रही थी. जैसे जैसे वो झरने के करीब आ रही थी उनकी रफ्तार बरती जा रही थी. कमरे मे फाच फाच की आवाज गूंज रही थी. जब उनकी संस् फूल गयी तो खुद नीचे आकार मुझे अपने ऊपर खींच लीया और टांगो को फैला कर ऊपर उठा लीया और बोली,
"मैं थक गयी मेरे राज्ज्ज्जा, अब तुम मोर्चा संभालो." मैं झट उनकी जांघों के बीच बैठ गया और निशाना लगा कर झटके से लंड अंदर डाल दीया और उनके ऊपर लेट कर दनादन शोट लगाने लगा. भाभी ने अपनी टांग को मेरी क़मर पर रख कर मुझे जाकड लीया और जोर जोर से चुतड उठा उठा कर चुदाई मे साथ देने लगी. मैं भी अब उतना अनारी नही रहा और उनकी चुंची को मसलते हुए ठ्का ठक शोट लगा रहा था. कमरा हमारी चुदाई की आवाज से भरा पडा था. भाभी अपनी क़मर हीला कर चुतड उठा उठा कर चुदा रही थी और बोली जा रही थी,
"अह्ह्ह आःह्ह्छ उन्ह्ह्छ ऊओह्ह्ह्ह् ऊऊह्ह्ह्ह्ह् हाआआन् हाआई मेरे राज्ज्ज्ज्जा, माआआर गय्य्य्य्य्ये रीएई, लाल्ल्ल्ल्ल्ला चूऊओद् रे चूऊओद्. उईईईई मीईईरीईइ माआया, फाआआअत् गाआआयीई रीईई आआआज तो मेरी चूत. मीईरा तो दूउयम निक्क्क्क्कल तूऊउने टूऊ आआज. बराआया जाआअलीएम् हाआईरे तूऊम्हाआआर लौडा, एक्दूऊम् महीईं अह्ह्ह्ह्छ! उह्ह्ह्ह्ह्ह्छ क्यया जन्नत का मज़ाआया सिखयाआअ तुनीईए. मैं तो तेराआया गुलाम हूऊऊ गयाया."
भाभी गांड उछल उछल कर मेरा लंड अपने चूत मे ले रही थी और मैं भी पुरे जोश के साथ उनकी चुन्चेओं को मसल मसल कर अपनी भाभी को चोदे जा रहा था. भाभी मुझको ललकार कर कहती, लगाओ शोट मेरे राजा", और मैं जवाब देता,
"यह ले मेरी रानी, ले ले अपनी चूत मे".
"जरा और जोर से सर्काओ अपना लंड मेरी चूत मे मेरे राजा",
"यह ले मेरी रानी, यह लंड तो तेरे लीये ही है."
"देखो राज्ज्ज्जा मेरी चूत तो तेरे लंड की दिवानी हो गयी, और जोर से और जोर से आआईईईईए मेरे राज्ज्ज्ज्ज्ज्जा. मैं गयीईईईईए रीई," कहते हुए मेरी भाभी ने मुझको कस कर अपनी बाँहों मे जाकड लीया और उनकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा चोर दीया. अब तक मेरा भी लंड पानी चोरने वाला था और मैं बोला,
"मैं भी अयाआआ मेरी जाआं," और मेने भी अपना लंड का पानी चोर दीया और मैं हाँफते हुए उनकी चुंची पर सीर रख कर कस के चिपक कर लेट गया. यह मेरी पहली चुदाई थी. इसीलिए मुझे काफी थकन महसूस हो रही थी. मैं भाभी के सीने पर सर रख कर सो गया. भाभी भी एक हाथ से मेरे सीर को धीरे धीरे से सहलाते हुए दुसरे हाथ से मेरी पीठ सहला रही थी. कुछ देर बाद होश आया तो मैंने भाभी के रसेल होंटों के चुम्बन लेकर उन्हें जगाया. भाभी ने करवट लेकर मुझे अपने ऊपर से हटाया और मुझे अपनी बाँहों मे कस कर कान मे फूस-फुसा कर बोली,
"लाला तुमने तो कमल कर दीया, क्यया गजब की ताकत है तुम्हारे लंड मे." मैंने उत्तेर दीया,
"कमल तो अपने कर दीया है भाभी, आजतक तो मुझे मालुम ही नही था की अपने लंड को कैसे इस्तेमाल कैसे करना है. यह तो अपकी मेहेर्बनी है जो की अज मेरे लंड को अपकी चूत की सेवा करने का मौका मीला." अबतक मेरा लंड उनकी चूत के बहार झांटो के जंगल मे रगर मर रहा था. भाभी ने अपनी मुलायम हथेलिओं मे मेरा लंड को पकड कर सहलाना शुरू कीया. उनकी उंगली मेरे अंडों से खेल रही थी. उनकी नाजुक उन्ग्लिओं का स्पर्श पकड मेरा लंड भी जाग गया और एक अंगराई लेकर भाभी की चूत पर ठोकर मरने लगा. भाभी ने कस कर मेरा लंड को क़ैद कर लीया और बोली,
"बहुत जान तुम्हारे लंड मे, देखो फीर से फर-फाराने लगा, अब मैं इसको चोदुन्गी." हम दोनो अगल बगल लेते हुए थे. भाभी ने मुझको चीत लेटा दीया, और मेरी टांग पर अपनी टांग चारा चारा कर लंड को हाथ से उमेथेने लगी. साथ ही साथ भाभी अपनी क़मर हिलाते हुए अपनी झंट और चूत मेरी जांघ पर रागारने लगी. उनकी चूत पिछली चुदाई से अभीतक गीली थी और उसका स्पर्श मुझे पागल बनाए हुए था. अब मुझसे रहा नही गया और करवट लेकर भाभी की तरफ मुँह करके लेट गया. उनकी चुंची को मुँह मे दबा कर चूसते हुए अपनी उंगली चूत मे घुसा कर सहलाने लगा. भाभी एक सिस्कारी लेकर मुझसे कस कर चिपट गयी और जोर जोर से क़मर हिलाते हुए मेरी उंगली से चुदवाने लगी. अपने हाथ से मेरे लंड को कस कर जोर जोर से मूठ मार रही थी. मेरा लंड पुरे जोश मे आकार लोहे की तरह सकत हो गया था. अब भाभी की बेताबी हद से ज्यादा बढ़ गयी थी और कुहद चीत हो कर मुझे अपने ऊपर खींच लीया. मेरे लंड को पकड कर अपनी चूत पर रखती हुई बोली,
"आऊँ मेरे राजा, सेकोन्द राउंड हो जाये." मैंने झट क़मर उठा कर धक्का दीया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जर तक धंस गया. भाभी चीख उठी और बोली,
"जीओ मेरे राजा, क्यया शोट मारा. अब मेरे सिखाये हुए तरीके से शोट पर शोट मरो और फर दो मेरी चूत को." भाभी की आदेश पा-कर मैं दूने जोश मे आ गया और उनकी चुंची को पकड कर हुमाच हुमाच कर भाभी की चूत मे लंड पेलने लगा. उंगली की चुदाई से भाभी की चूत गीली हो गयी थी और मेरा लंड सतासत अंदर-बहार हो रहा था. भाभी नीचे से क़मर उठा उठा कर हर शोट की जवाब पुरे जोश के साथ दे रही थी. भाभी ने दोनो हातों से मेरी क़मर को पकड रख्हा था और जोर जोर से अपनी चूत मे लंड घुस्वा रही थी. वो मुझे इतना उठाती थी की बस लंड की सुपाडा अंदर रहता और फीर जोर से नीचे खिंचती हुई घप से लंड चूत मे घुस्वा लेटी थीं. पुरे कमरे मे हमारी संस् और घपा-घप, फाच-फाच की आवाज गूंज रही थी. जब हम दोनो की तल से तल मील गयी तब भाभी ने अपने हाथ नीचे लाकर मेरे चुतड को पकड लीया और कस कस कर दबोच्ताए हुए मज़ा लेने लगी. कुछ देर बाद भाभी ने कहा,
"आऊँ एक नया आसन सीखती हूँ," और मुझे अपने ऊपर से हटा कर किनारे कर दीया. मेरा लंड `पक' की आवाज के साथ बहार नीकाल आया. मैं चीत लेटा हुआ था और मेरा लंड पुरे जोश के साथ सीधा खरा था. भाभी उठ कर घुटनों और हथेलिओं पर मेरे बगल मे बैठ गयी. मैं लंड को हाथ मे पकड कर उनकी हरकत देखता रहा. भाभी ने मेरा लंड पर से हाथ हटा कर मुझे खींच कर उठाते हुए कहा,
"ऐसे परे परे क्यया देख रहे हो, चलो अब उठ कर पीछे से मेरी चूत मे अपनी लंड को घुसो." मैं भी उठ कर भाभी के पीछे आकर घुटने के बाल बैठ गया और लंड को हाथ से पकड कर भाभी की चूत पर रागारने लगा. क्यया मस्त गोल गोल गद्दे दर गांड थी. भाभी ने जांघ को फैला कर अपने चुतड ऊपर को उठा दिए जिससे की उनकी रसीली चूत साफ नज़र आने लगी. भाभी की इशारा समझ कर मैंने लंड की सुपाडा उनकी चूत पर रख कर धक्का दीया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जर तक धंस गया. भाभी ने एक सिस्करी भर कर अपनी गांड पीछे कर के मेरी जांघ से चिपका दीं. मैं भी भाभी की पीठ से चिपक कर लेट गया और बगल से हाथ डाल कर उनकी दोनो चूची को पकड कर मसलने लगा. वो भी मस्ती मे धीरे धीरे चुतड को आगे-पीछे करके मज़े लेने लगी. उनके मुलायम चुतड मेरी मस्ती को दोगुना कर रहे थे. मेरा लंड उनकी रसीली चूत मे आराम से आगे-पीछे हो रहा था. कुछ देर तक चुदाई की मज़ा लेने के बाद भाभी बोली,
"काह्लो राज्ज्जा अब आगे उठा कर शोट लगाओ, अब रहा नही जता." मैं उठा कर सीधा हो गया और भाभी के चुतड को दोनो हाथों से कस कर पकड कर चूत मे हमला शुरू कर दीया. जैसा की भाभी ने सीखाया था मैं पुरा लंड धीरे से बहार नीकाल कर जोर से अंदर कर देता. शुरू मे तो मैंने धीरे धीरे कीया लेकीन जोश बरता गया और धक्को की रफ्तार बरती गयी. धक्का लगते समय मैं भाभी के चुतड को कस के अपनी ऊर खींच लेटा ताकी शोट तागाडा परे. भाभी भी उसी रफ्तार से अपने चुतड को आगे-पीछे कर रही थी. हम दोनो की सांसे तेज हो गयी थी. भाभी की मस्ती पुरे परवान पर थी. नंगे जिस्म जब आपस मे टकराते तो घप-घप की आवाज आती. काफी देर तक मैं उनकी क़मर पकड धक्का लगता रहा. जब हालत बेकाबू होने लगी तब भाभी को फीर से चीत लेटा कर उन पर सवार हो गया और चुदाई की दौर चालू रखा. हम दोनो ही पसीने से लथपथ हो गए थे पर कोई भी रुकने की नाम नही ले रहा था. तभी भाभी ने मुझे कस कर जाकड लीया और अपनी टंगे मेरे चुतड पर रख दीया और कस कर जोर जोर से क़मर हिलाते हुए चिपक कर झड गयी. उनके झडने के बाद मैं भी भाभी की चुंची को मसलते हुए झड गया और हांफते हुए उनके ऊपर लेट गया. हम दोनो की सांसे जोर जोर से चल रही थी और हम दोनो काफी देर तक एक-दुसरे से चिपक कर पडे रहे. कुछ देर बाद भाभी बोली,
"कयों लाला कैसी लगी हमारी चूत की चुदाई?" मैं बोला,
"हाय भाभी जीं कर्ता है की ज़िन्दगी भर इस्सी तरह से तुम्हारी चूत मे लंड डाले पडा रहूँ."
"जब तक तुम्हारे भैया वापस नही आती, यह चूत तुम्हारी है, जैसे मर्जी हो मज़े लो, अब थोरे देर आराम करतें है."
"नही भाभी, काम से काम एक बार और हो जय. देखो मेरा लंड अभी भी बेक़रार है." भाभी ने मेरे लंड को पकड कर कहा,
"यह तो ऐसे रहेगा ही, चूत की खुशबू जो मील गयी है. पर देखो रात के तीन बज गए है, अगर सुबह time से नही उठें तो पडोसीयौ को शक हो जाएगा. अभी तो सारा दीन सामने है और आगे के इतने दीन हमारे है. जीं भर कर मस्ती लेना. मेरा कहा मानोगे तो रोज नया स्वाद चखाऊगी." भाभी की कहना मान कर मैंने भी जीद चोड दीं और भाभी करवट ले कर लेट गयी और मुझे अप्नेसे सता लीया. मैंने भी उनकी गांड की दरार मे लंड फंसा कर चुंचीओं को दोनो हाथों मे पकड लीया और भाभी के कंधे को चूमता हुआ लेट गया. नींद कब आयी इसका पता ही नही चला..

1 comment:

Tinku Sharma said...

आंटी और भाभी जो भी सेक्स और फ़ोन सेक्समें इंटरेस्टेड हो मुझे मेरे इनबॉक्समे ं मेसेज करे....आपकी प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जायेगा!अगर किसी को फुलनाईट एन्जॉय करना हो तो वो भी मेसेज कर सकती है, लड़कियों भाभियों और आंटीयों से निवेदन है की प्ल.ीज एक बार सेवा का मौका दे!सिर्फ लड़कियां , आंटीयां और भाभियाँ... Or Con. Pls. 9013866212 Karo or sex ka pura pura anand uthao aapne land ki kasam aaj tak ke sare lando ko bhul jaogi, ye mera wada h

Post a Comment